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नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच जारी महायुद्ध अब केवल तेल के संकट तक सीमित नहीं रह गया है। इस युद्ध का सबसे खतरनाक पहलू है ईरान का वह परमाणु कार्यक्रम, जिसके तहत उसने 440 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का गुप्त भंडार तैयार कर रखा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया है।
ट्रंप ने अपने हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में स्पष्ट किया है कि ईरान की मिसाइल और वायुसेना को तबाह करने के बाद उनका मुख्य लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म करना है। अमेरिकी पेंटागन के जानकारों के अनुसार, ट्रंप का असली मकसद ईरान के उस यूरेनियम को कब्जे में लेना है, जिससे परमाणु बम बनाया जा सकता है। डर इस बात का है कि युद्ध की अराजकता में यह घातक पदार्थ किसी और के हाथों में न चला जाए।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरान ने अपने यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक संवर्धित कर रखा है। यदि इसे 90 प्रतिशत तक पहुँचा दिया जाए, तो यह सीधे परमाणु बम बनाने के काम आता है। गणना के अनुसार, 440 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम से ईरान 9 से 11 परमाणु बम तैयार करने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि अमेरिका इसे किसी भी कीमत पर हासिल करना चाहता है।
सवाल यह है कि इतने बमबारी के बावजूद यूरेनियम सुरक्षित कैसे है? अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मुताबिक, ईरान ने इस्फहान, फोर्डो और नतांज जैसी साइटों पर जमीन से 250 फीट नीचे बंकर बना रखे हैं। अमेरिकी हमलों में इन बंकरों के प्रवेश और निकास द्वार तो क्षतिग्रस्त हुए हैं, लेकिन अंदर रखा यूरेनियम अभी भी सुरक्षित होने का अनुमान है। ये यूरेनियम हाई-प्रेशर स्टील सिलेंडरों में सील है, जो मलबे के नीचे दबे हुए हैं।
इस बेहद जटिल और जोखिम भरे मिशन को अंजाम देने के लिए ट्रंप ने ज्वाइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) को चुना है। यह वही फोर्स है, जिसने सद्दाम हुसैन और ओसामा बिन लादेन जैसे दुश्मनों को खत्म किया था।
ट्रंप का प्लान है कि कमांडो यूनिट्स सीधे ईरान की धरती पर उतरें और बंकरों के अंदर से इन यूरेनियम सिलेंडरों को सुरक्षित बाहर निकालें। इस ऑपरेशन में सील टीम सिक्स , डेल्टा फोर्स और अमेरिकी रेंजर्स को साथ मिलकर काम करना होगा। यदि यह मिशन सफल होता है, तो ईरान का परमाणु कार्यक्रम दशकों पीछे चला जाएगा।
यह काम किसी युद्ध से कम नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती खुफिया जानकारी जुटाना है—यह पता लगाना कि किस बंकर में कितने सिलेंडर हैं। साथ ही, इन सिलेंडरों को निकालना तकनीकी रूप से बेहद खतरनाक है। यदि निकालते समय सिलेंडर क्षतिग्रस्त हुए और गैस लीक हुई, तो वहां बड़ा परमाणु विकिरण (Nuclear Radiation) फैल सकता है।
अमेरिकी सेना के इतिहास में केवल छह बार सील टीम , डेल्टा और रेंजर्स ने एक साथ किसी बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया है। अब देखना यह है कि ईरान की धरती पर होने वाला यह सातवां बैटलग्राउंड अमेरिका के लिए कितनी बड़ी सफलता या चुनौती लेकर आता है।
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— Zee News (@ZeeNews) March 21, 2026
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