युद्ध रोकना है तो पहले अमेरिका-इजराइल आक्रामकता बंद करें: पीएम मोदी से बोले ईरानी राष्ट्रपति
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच शनिवार को हुई टेलीफोनिक बातचीत ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। इस चर्चा में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालातों पर मुख्य रूप से बात हुई।

ईरान की दो टूक: पहले हमले रुकें, फिर गारंटी मिले

ईरानी दूतावास के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेशकियान ने साफ कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष का समाधान तभी संभव है जब अमेरिका और इजराइल तुरंत अपनी सैन्य आक्रामकता रोकें। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि केवल युद्ध विराम से काम नहीं चलेगा, बल्कि भविष्य में दोबारा ऐसे हमले न होने की ठोस गारंटी भी जरूरी है।

हमने युद्ध शुरू नहीं किया

बातचीत के दौरान पेजेशकियान ने स्पष्ट किया कि ईरान ने इस युद्ध की शुरुआत नहीं की थी। उन्होंने अमेरिका और इजराइल पर बिना किसी कानूनी आधार के हमले करने का आरोप लगाया। ईरानी राष्ट्रपति ने दावा किया कि इन हमलों में उनके वरिष्ठ सैन्य कमांडरों और नागरिकों को निशाना बनाया गया, जबकि सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया गया।

ट्रंप के दावों को किया खारिज

ईरान ने परमाणु हथियारों को लेकर अमेरिका के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि ये हमले ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए किए गए। पेजेशकियान ने कहा कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने हमेशा परमाणु हथियारों का कड़ा विरोध किया है।

इजराइल फैला रहा है अशांति

राष्ट्रपति ने इजराइल पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि असल में इजराइल ही गाजा, लेबनान, इराक और ईरान जैसे देशों में हिंसा और हत्याओं के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इजराइल शांति और सुरक्षा का बहाना बनाकर क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि वह संघर्ष का मुख्य कारण है।

ब्रिक्स से बड़ी भूमिका निभाने की अपील

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ईरानी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स (BRICS) देशों से अपील की है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स को ईरान के खिलाफ हो रही आक्रामकता को रोकने और अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने के लिए एक स्वतंत्र एवं सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

पीएम मोदी ने जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखने के महत्व को रेखांकित किया। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युद्ध का रास्ता किसी के भी हित में नहीं है और सभी पक्षों को संयम बरतते हुए शांति की ओर कदम बढ़ाने चाहिए।

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