नागपुर में गूंजी युवाओं की आवाज: उपराष्ट्रपति बोले- मातृभाषा में बोलना कमजोरी नहीं, मौलिकता है
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नागपुर के रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मृति मंदिर परिसर में भारतीय युवा संसद का 29वां राष्ट्रीय सत्र शुरू हो गया है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने युवाओं को प्रेरित करते हुए वैश्विक शांति और भारत की भाषाई शक्ति पर जोर दिया।

युद्ध के दौर में संवाद ही एकमात्र रास्ता उपराष्ट्रपति ने वर्तमान में दुनिया भर में मंडरा रहे युद्ध के खतरों पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हथियारों की होड़ कभी समाधान नहीं हो सकती। संवाद ही शांति स्थापित करने का एकमात्र जरिया है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे ऐसे नेतृत्व का निर्माण करें जो टकराव के बजाय समाधान पर केंद्रित हो।

भाषा पर गर्व, दूसरों का सम्मान इस वर्ष का विषय भारतीय भाषाएं और विकसित भारत-2047 रखा गया है। भाषा के मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा में बोलना किसी को क्षेत्रीय नहीं बनाता, बल्कि यह उसकी मौलिकता का परिचायक है। उन्होंने उदाहरण दिया कि जैसे मां से प्रेम करना स्वाभाविक है, वैसे ही अपनी भाषा और संस्कृति से प्रेम करना भी है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अपनी जड़ों पर गर्व करने का मतलब दूसरों का अनादर करना नहीं है।

संविधान को आम आदमी की भाषा तक ले जाने की पहल उपराष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की सराहना करते हुए बताया कि भारतीय भाषाओं के संरक्षण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने खुशी जताई कि अब संविधान का अनुवाद तमिल, गुजराती, डोगरी और संथाली जैसी भाषाओं में भी उपलब्ध है। इस कदम का उद्देश्य देश के हर नागरिक को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

अमृत पीढ़ी पर है विकसित भारत का दारोमदार संसद के सत्रों के अपने अनुभव साझा करते हुए राधाकृष्णन ने युवाओं को नसीहत दी कि चर्चा का अर्थ टकराव नहीं, बल्कि निष्कर्ष तक पहुंचना होना चाहिए। उन्होंने उपस्थित छात्रों को अमृत पीढ़ी संबोधित करते हुए कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना उधार के विचारों से नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी से जुड़कर ही पूरा होगा।

दुनिया की नजरें भारत पर अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने युवाओं में जोश भरते हुए कहा कि आज पूरा विश्व भारत की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। भारत की असली ताकत उसकी युवा पीढ़ी है। युवाओं को अब ऐसे मूल्यों को अपनाना होगा जो एक सशक्त और जीवंत राष्ट्र की नींव रखने में सहायक हों।

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