पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी बिसात बिछा दी है। बंगाल के लिए 10 प्रतिज्ञा नाम से जारी घोषणापत्र के जरिए टीएमसी ने अगले पांच साल का रोडमैप पेश किया है। यह महज वादों का पुलिंदा नहीं, बल्कि सत्ता विरोधी लहर को काटने का ममता का सटीक राजनीतिक हथियार है।
महिलाओं और युवाओं पर बड़ा दांव ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत महिला वोटर रही हैं। इसे और मजबूत करने के लिए उन्होंने लक्ष्मीर भंडार योजना को जीवनभर चलाने का वादा किया है। सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये और SC/ST वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये प्रतिमाह देने का ऐलान किया गया है। वहीं, बेरोजगार युवाओं के लिए बांग्लार युबा-साथी योजना के तहत 1,500 रुपये मासिक सहायता का भरोसा दिया गया है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे का कायाकल्प ग्रामीण वोटों को साधने के लिए टीएमसी ने कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया है। किसान परिवारों और भूमिहीन मजदूरों के लिए 30,000 करोड़ रुपये का अलग कृषि बजट लाने का संकल्प लिया गया है। इसके अलावा, हर परिवार को पक्का घर और घर-घर शुद्ध पेयजल पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। बेहतर गवर्नेंस के लिए ममता ने 7 नए जिले बनाने का वादा भी किया है।
हेल्थ और एजुकेशन: डोरस्टेप डिलीवरी का वादा शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए ममता ने जमीनी स्तर पर पहुँचने की रणनीति बनाई है। हर ब्लॉक में दुआरे चिकित्सा कैंप लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को घर बैठे स्वास्थ्य सुविधा मिले। वहीं, बांग्ला शिक्षायतन योजना के जरिए सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को वर्ल्ड-क्लास स्तर पर अपग्रेड करने का वादा किया गया है। बंगाल को व्यापारिक केंद्र बनाने के लिए ग्लोबल ट्रेड सेंटर और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की भी योजना है।
अक्रामक तेवर और 18 स्टार प्रचारकों की फौज ममता केवल लोकलुभावन वादों तक सीमित नहीं हैं; वे राजनीतिक मोर्चे पर भी आक्रामक हैं। चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के तबादले पर सवाल उठाते हुए उन्होंने इसे अघोषित राष्ट्रपति शासन करार दिया है। साथ ही, उन्होंने सीमा पार से राज्य में अशांति फैलाने की साजिश का आरोप लगाकर बंगाल की अस्मिता का कार्ड भी खेला है।
जीत के लिए तैयार योद्धा चुनाव प्रचार के लिए टीएमसी ने 18 स्टार प्रचारकों की एक मजबूत फौज उतारी है। इसमें ममता बनर्जी के साथ महासचिव अभिषेक बनर्जी मुख्य भूमिका निभाएंगे। यह टीम न केवल बंगाल बल्कि असम जैसे पड़ोसी राज्यों में भी पार्टी की साख बचाने और विस्तार करने के लिए पूरी ताकत झोंकने को तैयार है।
निष्कर्ष राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी ने जनकल्याणकारी योजनाओं और आक्रामक राष्ट्रवाद के मिश्रण से एक मज़बूत नैरेटिव तैयार किया है। अब देखना यह है कि क्या ये 10 प्रतिज्ञाएं बंगाल की जनता को चौथी बार तृणमूल कांग्रेस पर भरोसा करने के लिए प्रेरित कर पाएंगी, या विरोधी दलों की रणनीति इन वादों पर भारी पड़ेगी।
Today, I place before the people my 10 ‘Protigya’ for Bengal.
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) March 20, 2026
My commitments span every pillar of governance, strengthening support for women, youth, farmers, landless agricultural labourers, and the elderly; advancing education and healthcare; ensuring housing and piped… pic.twitter.com/LIhsJsliCr
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