अबू धाबी: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की आक्रामक गतिविधियों ने वैश्विक शक्तियों को एकजुट होने पर मजबूर कर दिया है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और यूएई सहित 25 से अधिक ताकतवर देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। इन देशों ने स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की दादागिरी और निराधार हमलों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों और तेल पाइपलाइनों को निशाना बनाना सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रहार है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि ईरान की यह हरकत न केवल क्षेत्रीय शांति को भंग कर रही है, बल्कि दुनिया भर में ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला के लिए भारी संकट पैदा कर रही है।
समुद्री कानून का खुला उल्लंघन ईरान पर समुद्र में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने और ड्रोन हमलों के जरिए जहाजों को डराने का आरोप है। संयुक्त बयान में यूएन सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का हवाला देते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय अपराध करार दिया गया। देशों ने जोर देकर कहा कि समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता एक मौलिक अधिकार है, जिसे ईरान अपनी कूटनीतिक चालों से कुचल नहीं सकता।
ऊर्जा संकट से निपटने की तैयारी ईरान की ब्लैकमेलिंग के असर को कम करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने सक्रिय भूमिका निभाई है। कीमतों को स्थिर रखने के लिए इमरजेंसी तेल रिजर्व को बाजार में जारी करने का फैसला लिया गया है। गठबंधन के देश अन्य उत्पादक देशों के साथ मिलकर उत्पादन बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं, ताकि ईरान के हमलों से वैश्विक बाजार में हाहाकार न मचे।
क्या होगा अगला कदम? 25 देशों के इस गठबंधन ने साफ कर दिया है कि वे होर्मुज के रास्ते को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे। वे समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक साझा निगरानी योजना पर काम कर रहे हैं। साथ ही, इस संकट से प्रभावित होने वाले देशों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों (IFIs) के साथ मिलकर ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। ईरान के लिए अब स्पष्ट संदेश है: यदि वह अपनी मिसाइल और ड्रोन धमकियों को नहीं रोकता, तो उसे गंभीर कूटनीतिक और सुरक्षात्मक परिणामों का सामना करना पड़ेगा।
Joint Statement on the Strait of Hormuzhttps://t.co/fVPAYozdF4 pic.twitter.com/n25zPDCtLO
— MoFA وزارة الخارجية (@mofauae) March 21, 2026
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