ईरान के हमले से दहला कतर, ट्रंप को सुनाई खरी-खोटी; बोले- नुकसान भरने में लगेंगे 5 साल
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ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष अब खाड़ी देशों के लिए जी का जंजाल बन गया है। इजरायल द्वारा ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर किए गए हमले के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया है। इस हमले से कतर को भारी आर्थिक और इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान हुआ है।

कतर की चेतावनी अनसुनी करना पड़ा भारी कतर एनर्जी के सीईओ और ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने इस तबाही के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अमेरिकी प्रशासन को बार-बार चेतावनी दी थी कि ईरान के तेल और गैस ठिकानों पर हमला करने से खाड़ी देशों के ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरा बढ़ जाएगा। बावजूद इसके, अमेरिका ने उनकी चिंताओं को नजरअंदाज किया।

दुनिया का सबसे बड़ा गैस सिस्टम तबाह ईरान की मिसाइलों ने कतर के रास लाफान इलाके को निशाना बनाया, जहां दुनिया की सबसे बड़ी एलएनजी (LNG) रिफाइनरी स्थित है। इस हमले से समुद्री मार्ग से होने वाली गैस आपूर्ति का पूरा तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कतर के अधिकारियों का मानना है कि इस बुनियादी ढाँचे को दोबारा खड़ा करने और सामान्य स्थिति बहाल करने में कम से कम पांच साल का लंबा वक्त लगेगा।

ट्रंप को रोजाना याद दिलाते थे काबी साद अल-काबी ने खुलासा किया कि वे राष्ट्रपति ट्रंप को लगभग रोजाना स्थिति की गंभीरता के बारे में आगाह करते रहे थे। साद का कहना था, मैंने उनसे स्पष्ट कहा था कि तेल और गैस ठिकानों पर किसी भी हमले से हम सबको बचना चाहिए, क्योंकि इसका खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ेगा।

व्हाइट हाउस की सफाई इस तनावपूर्ण स्थिति पर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी ऊर्जा टीम को इस बात का पहले से आभास था कि ईरान में सैन्य अभियानों के दौरान ऊर्जा आपूर्ति में कुछ समय के लिए बाधा आएगी। हालांकि, अब अमेरिका स्थिति को संभालने और कतर एनर्जी के साथ मिलकर मरम्मत कार्य में सहयोग देने का वादा कर रहा है।

ऊर्जा बाजार पर गहरा संकट पिछले तीन हफ्तों से जारी ईरान-इजरायल युद्ध में मिसाइल और ड्रोन हमलों ने टैंकरों, रिफाइनरियों और अन्य महत्वपूर्ण ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी क्षति पहुंचाई है। कोनोकोफिलिप्स जैसी कंपनियों का कहना है कि वे कतर के साथ मिलकर इस आपदा से उबरने के लिए काम कर रही हैं, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर लंबे समय तक बने रहने की आशंका है।

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