वैश्विक तनाव के बीच भारत-चीन ने मिलाया हाथ: लिपुलेख दर्रे से फिर शुरू होगा व्यापार
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6 साल का लंबा इंतजार खत्म दुनिया इस समय अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के साये में है। इस बीच, भारत और चीन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए सीमा व्यापार को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे से व्यापार का रास्ता जून 2026 से फिर से खुल जाएगा। यह रूट 2019 में कोरोना महामारी और सीमा पर बढ़े तनाव के बाद बंद कर दिया गया था।

तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद स्थानीय प्रशासन ने कमर कस ली है। विदेश, गृह और वाणिज्य मंत्रालयों की हरी झंडी मिलने के बाद पिथौरागढ़ जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है। इस व्यापारिक सीजन के लिए ट्रांजिट कैंप, बैंकिंग सुविधाएं, कस्टम विभाग की तैनाती, सुरक्षा व्यवस्था और मेडिकल एड की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यह व्यापार आमतौर पर जून से सितंबर के दौरान सक्रिय रहता है।

नेपाल का पुराना एतराज इस फैसले पर नेपाल ने कड़ा विरोध जताया है। काठमांडू का दावा है कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके दार्चुला जिले का हिस्सा हैं। नेपाल 1816 की सुगौली संधि का हवाला देते हुए काली नदी को सीमा मानता है, जबकि भारत इन इलाकों को अपनी पूर्ण संप्रभुता का हिस्सा मानता है। 2020 में भारत द्वारा धारचूला से लिपुलेख तक सड़क बनाने के बाद से नेपाल ने इसे आधिकारिक रूप से अपने नए नक्शे में भी शामिल कर लिया था, जिसे भारत ने खारिज कर दिया था।

भारत की दोहरी रणनीति भारत ने स्पष्ट किया है कि वह सीमा विवादों को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन साथ ही वह आर्थिक गतिविधियों को बाधित नहीं करना चाहता। 1992 में चीन के साथ व्यापार के लिए खुला यह दर्रा न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए जीवन रेखा है, बल्कि कैलाश मानसरोवर यात्रा का भी प्रमुख मार्ग है।

आर्थिक और रणनीतिक लाभ लिपुलेख दर्रे के खुलने से सीमावर्ती भोटिया समुदाय और स्थानीय व्यापारियों को सीधे तौर पर बड़ा फायदा होगा। 2019 से तिब्बत के तकलाकोट में फंसे व्यापारियों के सामान की वापसी का रास्ता साफ हो जाएगा। इसके अलावा, इस कदम को भारत-चीन के बीच रिश्तों में धीरे-धीरे आ रही स्थिरता के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है, जिससे सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर को नई मजबूती मिलेगी।

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