USS Gerald Ford में आग: क्या ये महज एक हादसा या सैनिकों का विद्रोह ?
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दुनिया के सबसे आधुनिक और ताकतवर युद्धपोत USS गेराल्ड आर. फोर्ड का सफर अचानक थम गया है। जहाज पर लगी भीषण आग के बाद इसे सक्रिय अभियानों से हटाकर मरम्मत के लिए ग्रीस के सूडा बे भेजा जा रहा है। इस घटना ने अमेरिकी नौसेना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लॉन्ड्री एरिया से उठी आग, 200 सैनिक घायल रिपोर्ट्स के मुताबिक, आग जहाज के लॉन्ड्री एरिया से शुरू हुई और तेजी से क्रू के रहने वाले हिस्सों (स्लीपिंग बर्थ) तक फैल गई। इस घटना में करीब 200 नौसैनिक धुएं के कारण बीमार पड़ गए और लगभग 100 स्लीपिंग बर्थ क्षतिग्रस्त हो गए। सीमित जगह होने के कारण जहाज के अंदर आग का फैलना बेहद खतरनाक साबित हुआ।

जंग से बचने की तरकीब या थकान का नतीजा? क्या यह आग जानबूझकर लगाई गई? हालांकि आधिकारिक जांच अभी जारी है, लेकिन एक्सपर्ट्स तोड़फोड़ (Sabotage) की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं। कई लोग इसे सैनिकों के मानसिक तनाव और जंग से बाहर निकलने की हताशा से जोड़कर देख रहे हैं।

10 महीने की लंबी तैनाती बनी नासूर सामान्यतः नौसेना की गाइडलाइन 6-8 महीने की तैनाती की होती है, लेकिन फोर्ड को लगातार 10 महीनों तक समुद्र में रखा गया। इतनी लंबी तैनाती ने न केवल मशीनों को खराब किया, बल्कि सैनिकों के मनोबल को भी तोड़ दिया है। हजारों सैनिकों का लंबे समय तक घर से दूर रहना उनके काम करने की क्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

गंदगी और तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा था क्रू जहाज पर केवल आग ही नहीं, बल्कि बदहाली भी थी। सीवेज और प्लंबिंग सिस्टम की लगातार खराबियों ने नौसैनिकों का जीना दुश्वार कर दिया था। टॉयलेट्स ब्लॉक होने और गंदगी भरे माहौल में काम करने से क्रू शारीरिक और मानसिक रूप से टूट चुका था। इसे तैरता हुआ शहर कहा जाता है, लेकिन व्यवस्था की कमी ने इसे नरक बना दिया था।

क्या है भविष्य की रणनीति? फिलहाल अमेरिकी नौसेना जांच कर रही है कि यह चूक ऑपरेशन प्लानिंग की थी या क्रू मैनेजमेंट की। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक रखरखाव में देरी और सैनिकों पर अत्यधिक दबाव भविष्य में ऐसे और बड़े जोखिम पैदा कर सकता है। क्या अमेरिका ईरान जैसे तनावपूर्ण माहौल में अपने सैनिकों को हद से ज्यादा थका रहा है? यह एक बड़ा रणनीतिक सवाल है।

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