जंग के साये में भारत का मानवीय कवच : ईरान को भेजी मेडिकल मदद, दोस्ती को दी नई उड़ान
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मिडिल ईस्ट में छिड़े भीषण युद्ध और चारों तरफ मची तबाही के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी वसुधैव कुटुंबकम की नीति को साबित किया है। युद्ध की आग में झुलस रहे ईरान के लिए भारत ने अपना दिल खोलते हुए बड़ी मानवीय सहायता भेजी है।

ईरान को मिली जीवन रक्षक संजीवनी भारत ने मुश्किल वक्त में ईरान को मेडिकल एड की पहली खेप पहुंचाई है। यह सहायता सामग्री सीधे ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी को सौंपी गई है। भारत के इस कदम की न केवल ईरान में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हो रही है।

भारत में स्थित ईरानी दूतावास ने इस मदद के लिए आभार व्यक्त किया है। दूतावास ने कहा, हम भारत के दयालु लोगों के प्रति हार्दिक कृतज्ञता प्रकट करते हैं। यह मदद ऐसे समय में आई है जब ईरान को दवाओं और इलाज के सामान की सबसे ज्यादा दरकार है।

रणनीतिक मोर्चे पर मिली बड़ी राहत यह मदद ऐसे समय में दी गई है जब भारत और ईरान के बीच रणनीतिक सहयोग एक नए स्तर पर है। हाल ही में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) से भारत के दो एलपीजी से लदे जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया है।

मौजूदा जंग के कारण यह समुद्री रास्ता बेहद खतरनाक हो चुका है और कई देशों के जहाज यहां से गुजरने में कतरा रहे हैं। ईरान के इस सहयोग ने भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की है, जो इस तनावपूर्ण माहौल में किसी बड़ी जीत से कम नहीं है।

बढ़ता तनाव और भारत की बैलेंस डिप्लोमेसी 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे क्षेत्र में पिछले 20 दिनों से युद्ध जारी है।

इस जंग के बीच जहां दुनिया के कई देश दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं, वहीं भारत ने अपनी तटस्थता और मानवीय दृष्टिकोण को बरकरार रखा है। भारत ने न केवल ईरान की मदद की, बल्कि कोचीन में फंसे ईरानी नागरिकों को भी सुरक्षित स्वदेश पहुंचाया है।

क्यों अहम है ये दोस्ती? ईरान का स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नियंत्रण है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की मुख्य धमनियों में से एक है। ईरान द्वारा जहाजों को रास्ता देना और बदले में भारत द्वारा मेडिकल एड भेजना, दोनों देशों के गहरे कूटनीतिक रिश्तों को दर्शाता है।

युद्ध के इस दौर में भारत ने यह दिखा दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी कूटनीति के रास्ते खुले रखे जा सकते हैं। जहां एक तरफ भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए सक्रिय है, वहीं दूसरी तरफ शांति और मानवता का संदेश फैलाने में भी पीछे नहीं है।

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