उत्तर कोरियाई चुनाव: किम जोंग उन की ऐतिहासिक जीत के बीच 0.07% विरोधियों की चर्चा तेज
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उत्तर कोरिया में हाल ही में संपन्न हुए संसदीय चुनावों के नतीजे किसी को हैरान नहीं कर रहे हैं, लेकिन इन नतीजों के साथ जारी किए गए आंकड़ों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। सरकारी मीडिया केसीएनए के अनुसार, किम जोंग उन की वर्कर्स पार्टी और उनके सहयोगियों ने 99.93% वोट हासिल कर संसद की सभी 687 सीटें जीत ली हैं।

मतदान का अकल्पनीय आंकड़ा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, देश में 99.99% मतदान दर्ज किया गया। केवल नगण्य प्रतिशत लोग ही विदेश में होने या समुद्र में काम करने के कारण मतदान नहीं कर सके। यह आंकड़ा जितना चौंकाने वाला है, उतनी ही चर्चा उस 0.07% असहमति वाले वोटों की हो रही है, जो सरकारी उम्मीदवारों के विरोध में डाले गए।

इतिहास में पहली बार स्वीकार की गई असहमति विशेषज्ञों के लिए सबसे दिलचस्प बात यह है कि 1957 के बाद पहली बार उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने आधिकारिक रूप से विरोधी वोटों का जिक्र किया है। आम तौर पर इस देश में ऐसे चुनाव सर्वसम्मति वाले होते हैं, जहां विरोध का कोई स्थान नहीं होता। इस बार 0.07% का जिक्र करना एक असामान्य और रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर व्यंग्य की बौछार इंटरनेट पर लोग इस चुनावी परिणाम का मजाक उड़ा रहे हैं। सोशल मीडिया उपयोगकर्ता व्यंग्यात्मक टिप्पणियां कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, उन 0.07% बहादुर लोगों की चिंता है। वहीं अन्य यूजर्स किम जोंग उन की तस्वीर साझा करते हुए पूछ रहे हैं कि क्या उन विरोध करने वाले लोगों का पता चल गया है। यह आंकड़ा लोगों के लिए एक पहेली बना हुआ है।

सिर्फ एक उम्मीदवार, कोई विकल्प नहीं उत्तर कोरिया की चुनाव प्रक्रिया को अक्सर दिखावटी चुनाव कहा जाता है। नियम के अनुसार, हर निर्वाचन क्षेत्र में केवल एक ही उम्मीदवार खड़ा होता है। मतदाताओं के पास केवल हां या नहीं में वोट करने का विकल्प होता है। हालांकि, नहीं कहना वहां के सख्त कानूनों के तहत जान जोखिम में डालने के बराबर है।

संसद में परिवार का दबदबा इस बार की संसद में भी किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने अपनी जगह सुरक्षित कर ली है। किम जोंग उन ने खुद वोट डालने के लिए एक कोयला खदान का दौरा किया, जहां उन्होंने युवा कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया। भले ही चुनाव के नतीजे पहले से तय थे, लेकिन 0.07% के इस छोटे से आंकड़े ने वैश्विक स्तर पर उत्तर कोरिया की चुनावी पारदर्शिता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

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