राहुल-प्रियंका की नितिन गडकरी से मुलाकात: बस बॉडी बिल्डर्स की समस्याओं का निकलेगा समाधान?
News Image

संसद भवन में आज एक महत्वपूर्ण और दिलचस्प नजारा देखने को मिला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस मुलाकात का एक वीडियो भी सामने आया है, जो राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

मुलाकात का मुख्य मुद्दा: राजस्थान के बस बॉडी बिल्डर्स इस उच्च-स्तरीय बैठक का मकसद राजस्थान के हजारों बस बॉडी बिल्डर्स की समस्याओं को सरकार के सामने रखना था। विशेष रूप से जयपुर और जालौर क्षेत्र के कारोबारी इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। उनकी आजीविका पर मंडराते खतरों को लेकर कांग्रेस नेताओं ने मंत्री का ध्यान आकर्षित किया।

नियमों की पेचिदगी और संकट केंद्र सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा के लिए बस बॉडी कोड (AIS 052) लागू किया है। इसके तहत कड़े सुरक्षा मानक और जटिल सर्टिफिकेशन प्रक्रिया अनिवार्य है। छोटे और मध्यम स्तर के बॉडी बिल्डर्स का कहना है कि भारी-भरकम फीस और कठिन प्रक्रियाओं के कारण उनका पारंपरिक व्यवसाय ठप होने की कगार पर है।

क्या बोले राहुल और प्रियंका? बैठक के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर हजारों छोटे उद्योगों को खत्म नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, प्रियंका गांधी ने नितिन गडकरी को बताया कि राजस्थान में पीढ़ियों से लोग इस काम से जुड़े हैं, और नए नियमों ने कारीगरों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा कर दी है। उन्होंने नियमों में लचीलापन लाने की मांग की।

नितिन गडकरी का रुख केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने विपक्ष के दोनों नेताओं की बात गंभीरता से सुनी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रियों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और इससे समझौता नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने छोटे उद्यमियों की दिक्कतों को समझते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे राजस्थान बस बॉडी बिल्डर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करें।

क्या मिलेगी राहत? अगर सरकार इन नियमों में बदलाव या राहत देती है, तो राजस्थान के जयपुर, जोधपुर और भीलवाड़ा जैसे शहरों के सैकड़ों वर्कशॉप्स को नई संजीवनी मिल सकती है। वर्तमान में, मान्यता प्रमाणपत्र न होने के कारण इन बिल्डर्स द्वारा तैयार की गई बसों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है, जिससे करोड़ों रुपये का निवेश फंसा हुआ है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सड़क परिवहन मंत्रालय छोटे उद्यमियों के हित में क्या ठोस कदम उठाता है।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

केसी त्यागी के JDU छोड़ने पर पार्टी का बड़ा खुलासा, क्या NDA के भीतर ही बदल रहे हैं ठिकाना?

Story 1

बिहार का नया किंग कौन? सम्राट चौधरी के सीएम बनने पर डिप्टी सीएम की कुर्सी पर किसकी नजर?

Story 1

खड़गे के शादी वाले तंज पर देवेगौड़ा का करारा पलटवार, बोले- कांग्रेस के साथ रिश्ता Abusive था, इसलिए तलाक लेना पड़ा

Story 1

रामनवमी 2026: पटना महावीर मंदिर में रात 2 बजे खुलेंगे कपाट, 18 हजार किलो नैवेद्यम की तैयारी

Story 1

फ्लाइट छोड़कर क्यों थर्ड एसी ट्रेन में सवार हुए शिवम दुबे? सामने आई सच्‍चाई

Story 1

अब ऑनलाइन किराए पर लें आम का पूरा पेड़, घर बैठे पाएंगे सीधे बागों से ताजा फल

Story 1

राहुल-प्रियंका की नितिन गडकरी से मुलाकात: बस बॉडी बिल्डर्स की समस्याओं का निकलेगा समाधान?

Story 1

असम विधानसभा चुनाव 2026: क्या किंगमेकर बदरुद्दीन अजमल का सियासी सूर्य अस्त हो रहा है?

Story 1

मोदी सरकार का पावर प्लान: ₹2584 करोड़ की स्कीम से चमकेगा पहाड़ी राज्यों का भविष्य

Story 1

क्या नीतीश कुमार ने चुन लिया अपना उत्तराधिकारी? सम्राट चौधरी को लेकर सीएम का बड़ा बयान