मरने के बाद विरोध नहीं, यह हमारी परंपरा: खामेनेई पर RSS का बड़ा बयान
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हरियाणा के पानीपत में चल रही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के समापन पर सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई पर टिप्पणी करते हुए भारतीय संस्कृति और परंपरा का उल्लेख किया।

मृत्यु पर विरोध नहीं, यह है संस्कार दत्तात्रेय होसबोले ने स्पष्ट किया कि भारतीय परंपरा में किसी के जीवित रहते हुए वैचारिक मतभेद या विरोध हो सकता है, लेकिन मृत्यु के बाद विरोध करना हमारी संस्कृति नहीं है। उन्होंने कहा, भारत की परंपरा रही है कि जीवित रहते आपका विरोध हो सकता है, लेकिन मरने के बाद उनका कोई विरोध नहीं होता। साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि विरोध का तरीका हमेशा शांतिपूर्ण होना चाहिए।

दुर्गम क्षेत्रों में संघ का विस्तार संगठनात्मक दृष्टि से संघ के विस्तार पर चर्चा करते हुए होसबोले ने बताया कि संघ अब अंडमान, अरुणाचल और लेह जैसे सुदूरवर्ती और दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य इन कठिन इलाकों में भी अपनी शाखाओं को सक्रिय करना है।

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति होसबोले ने कहा कि संघ की प्राथमिकता समाज से औपनिवेशिक मानसिकता को हटाना है। उन्होंने पंच परिवर्तन को लागू करने की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि संघ की शाखाओं में आने वाले स्वयंसेवक जाति, क्षेत्र और समुदाय से ऊपर उठकर संपूर्ण राष्ट्र के हित में सोचते हैं।

शताब्दी वर्ष: सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। होसबोले ने बताया कि अब तक गुरु तेग बहादुर जी के शताब्दी वर्ष पर 2,134 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें करीब 7 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, युवाओं के लिए विशेष योजनाएं और वंदे मातरम की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

प्राकृतिक खेती और सांगठनिक बदलाव संघ अब प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए ग्रीन हाउस (छतों पर खेती) का कॉन्सेप्ट अपना रहा है, जिसमें गोबर और गोमूत्र का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा, संगठन को और अधिक सुचारू बनाने के लिए विकेंद्रीकरण की योजना है। भविष्य में प्रांतों की संख्या बढ़ाकर 80 से अधिक संभागों में काम का बंटवारा किया जाएगा ताकि कार्य विस्तार को गति दी जा सके।

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