अनवर मणिप्पाडी को जान से मारने की धमकी: अमित शाह ने सदन में लिया था नाम
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कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष अनवर मणिप्पाडी ने दावा किया है कि उन्हें इंटरनेट के माध्यम से लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है।

उनका कहना है कि पिछले दो-तीन दिनों से उन्हें धमकी भरे कॉल आ रहे हैं और इस बारे में पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। ये धमकियां उन्हें वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 पर चर्चा के बाद मिल रही हैं।

दरअसल, वक्फ बिल पर सदन में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अनवर मणिप्पाडी का नाम लिया था। मणिप्पाडी का कहना है कि इसके बाद से उन्हें और भी ज्यादा धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। उन्होंने मौखिक रूप से मंगलुरु शहर के पुलिस आयुक्त अनुपम अग्रवाल को भी इस मामले को देखने के लिए कहा है।

मणिप्पाडी का कहना है, मुझे कई सालों से धमकियां मिल रही हैं। 2 अप्रैल को वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद से मुझे और भी ज्यादा कॉल आने लगे। कॉल करने वाले मराठी, कन्नड़, अंग्रेजी और उर्दू में बात कर रहे थे। एक व्यक्ति विदेशी की तरह बोल रहा था और कह रहा था कि मेरी वजह से देश के नेताओं के नाम खराब हुए हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा लग रहा था कि ये धमकी भरे फोन इंटरनेट कॉल थे। मुझे वो कह रहे थे कि मेरा समय खत्म हो रहा है । कहा जा रहा है कि वे (केंद्र सरकार) वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन पर मेरी रिपोर्ट के आधार पर बिल में संशोधन लेकर आए हैं।

अनवर मणिप्पाडी ने आगे कहा, अमित शाह ने भी वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान मेरी रिपोर्ट का जिक्र किया है। मेरे दोस्तों ने भी मुझे बाहर निकलते समय सावधान रहने को कहा है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी को भी कॉल के बारे में सूचित कर दिया है।

मणिप्पाडी ने बताया कि उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं है कि उन्हें मौत की धमकियां कौन दे रहा है। पुलिस आयुक्त अग्रवाल ने कहा कि अनवर मणिप्पाडी ने शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा, यह एक गैर-संज्ञेय अपराध है और नए बीएनएस अधिनियम के अनुसार पीड़ित को अदालत जाना होगा।

अनवर मणिप्पाडी ने कहा, मैंने कादरी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मुझे करीब 10 धमकी भरे कॉल आए हैं और पुलिस को उनकी जांच कर उन्हें पकड़ना चाहिए।

अनवर मणिप्पाडी अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े कई मुद्दों पर मुखर रहे हैं और उन्होंने कर्नाटक में भाजपा का जनाधार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। वे कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

मणिप्पाडी 2012 में तब चर्चा में आए थे, जब उन्होंने कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कर्नाटक वक्फ बोर्ड द्वारा नियंत्रित 27,000 एकड़ भूमि का या तो दुरुपयोग किया गया है या अवैध रूप से आवंटित किया गया है। भूमि का मूल्य 2,000 अरब आंका गया था।

उनकी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने रियल एस्टेट माफिया के साथ मिलीभगत करके राजनेताओं और बोर्ड के सदस्यों को अपनी लगभग 50% जमीन को उसके बाजार मूल्य के एक अंश पर गबन करने की अनुमति दी थी।

अनवर मणिप्पीडि ने सरकार से सिफारिश की थी कि वे वक्फ बोर्ड पर भ्रष्ट गतिविधियों की जांच के लिए एक समिति का गठन करे और वक्फ बोर्ड द्वारा अवैध रूप से बेची गई संपत्तियों को वापस लेने के लिए एक टास्क फोर्स नियुक्त करे। उन्होंने 31 कांग्रेस नेताओं और रियल एस्टेट डीलरों के बीच वक्फ संपत्ति के रिकॉर्ड हेराफेरी को लेकर भी खुलासा किया था।

उन्हें पहले भी कई बार धमकी मिल चुकी है। उनका कहना है कि जब से उन्होंने कर्नाटक वक्फ बोर्ड को लेकर खुलासे किए हैं, उन्हें जान से मारने की धमकी मिलती रहती है।

अनवर मणिप्पडी वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के समर्थन में हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा है, यह संशोधन बहुत ज़रूरी हैं। इनके बिना, एक या दो साल में लोग इस मुद्दे को भूल सकते हैं और स्थिति पहले जैसी ही बनी रहेगी। इसलिए, मैं इस सिफारिश का पुरजोर समर्थन करता हूं।

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