लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पेश होने के साथ ही सियासी घमासान शुरू हो गया है। विपक्ष ने विधेयक को अल्पसंख्यक विरोधी बताते हुए सरकार पर हमला बोला है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे मुस्लिम समुदाय के हित में बताया है।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर अल्पसंख्यकों के प्रति सहानुभूति दिखाने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि लोकसभा में बीजेपी के कितने अल्पसंख्यक सांसद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार उस समुदाय की छवि धूमिल कर रही है जिसने भारत की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी और जिन्ना के दो-राष्ट्र सिद्धांत को खारिज कर दिया।
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक संविधान के अनुरूप है और वक्फ बोर्डों में पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को प्रतिनिधित्व दिलाना चाहता है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्डों में पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाना संविधान में मिले अधिकारों का उल्लंघन है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि अभी तक पार्टी अपने अध्यक्ष का चुनाव नहीं कर पाई है, जिस पर गृह मंत्री अमित शाह ने चुटकी ली।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि देश में वक्फ संपत्तियां 4.9 लाख से बढ़कर 8.72 लाख हो गई हैं और अगर इनका सही ढंग से प्रबंधन किया जाए तो इससे न केवल मुसलमानों का जीवन बेहतर होगा, बल्कि पूरे देश की तकदीर भी बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक से सरकार धार्मिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, यह सिर्फ संपत्ति के प्रबंधन का मामला है और विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है।
रिजिजू ने यह भी कहा कि 2013 में यूपीए सरकार ने वक्फ बोर्ड को ऐसा अधिकार दिया कि वक्फ बोर्ड के आदेश को किसी सिविल अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि अगर यूपीए सरकार सत्ता में होती तो संसद इमारत समेत कई इमारतों को वक्फ संपत्ति घोषित कर दिया जाता क्योंकि इन पर भी दावा किया जा रहा था।
AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि अगर यह विधेयक संसद में पारित हो जाता है तो वे इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।
विधेयक का विरोध करते हुए सपा सांसद बीरेन्द्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक केवल मुस्लिम समुदाय को टारगेट करते हुए लाया जा रहा है और धार्मिक मामलों में छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि सरकार लोकतंत्र के खिलाफ जा रही है और हर धर्म की अपनी व्यवस्था होती है, जिसमें सरकार को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि सरकार का इरादा ठीक नहीं है और यह विधेयक संविधान के खिलाफ है और देश की अखंडता और एकता के खिलाफ है।
सपा सांसद जावेद अली खान ने कहा कि यह विधेयक अनुचित तरीके से एक धर्म विशेष के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की दृष्टि से लाया जा रहा है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के लिए यह बिल लाया जा रहा है उनकी ही बातों को अहमियत ना देना सबसे बड़ी नाइंसाफी है।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सहयोगी पार्टी जनसेना ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को अपना समर्थन दिया है। पार्टी का मानना है कि इस संशोधन से मुस्लिम समुदाय को लाभ होगा।
#WATCH दिल्ली | वक्फ संशोधन विधेयक पर AIMPLB के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा, ...अगर यह विधेयक संसद में पारित हो जाता है, तो हम इसके खिलाफ़ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। हम चुप नहीं बैठेंगे। हम अपने पास उपलब्ध सभी कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग करेंगे। जब… pic.twitter.com/2mpzVDTxMN
— ANI_HindiNews (@AHindinews) April 2, 2025
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