पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल के दावे पर घमासान: तेल कंपनियों ने सरकार की जांच रिपोर्ट को नकारा
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कर्नाटक में पेट्रोल में एथेनॉल के मिश्रण को लेकर सरकार और तेल कंपनियों (OMCs) के बीच विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार ने पेट्रोल में 31.2% तक एथेनॉल होने का दावा किया है, जिसे तेल कंपनियों ने सिरे से खारिज कर दिया है।

क्या है कर्नाटक सरकार का दावा?

राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री रिजवान अरशद ने आरोप लगाया था कि बेंगलुरु और कई अन्य जिलों में पेट्रोल पंपों पर 20% की निर्धारित सीमा से कहीं अधिक एथेनॉल बेचा जा रहा है। सरकार का दावा है कि उनके द्वारा लिए गए नमूनों में एथेनॉल की मात्रा 26% से 31.2% के बीच पाई गई है।

तेल कंपनियों की दो टूक: जांच प्रक्रिया गलत है

इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने एक संयुक्त बयान जारी कर इन दावों को तकनीकी रूप से गलत बताया है। कंपनियों का कहना है कि सरकार की यह जांच मोटर स्पिरिट ऑर्डर 2005 और मार्केटिंग डिसिप्लिन गाइडलाइंस (MDG) के नियमों का पालन नहीं करती है।

नियमों की अनदेखी का आरोप

तेल कंपनियों ने बताया कि नियमों के तहत नमूने लेते समय ओएमसी प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य है और कुल छह सैंपल लिए जाने चाहिए। कंपनियों का आरोप है कि अक्टूबर में लिए गए नमूनों के दौरान न तो उनके प्रतिनिधि मौजूद थे और न ही उन्हें जांच के लिए समानांतर सैंपल या रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई।

थर्ड-पार्टी लैब की विश्वसनीयता पर सवाल

कंपनियों ने स्पष्ट किया कि सरकार ने जिन रिपोर्टों का हवाला दिया है, वे अधिकृत सरकारी प्रयोगशालाओं के बजाय किसी थर्ड-पार्टी लैब द्वारा जारी की गई हैं। इन रिपोर्टों में इतनी तकनीकी जानकारी भी नहीं है कि एथेनॉल की मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि की जा सके।

क्या कहता है डेटा?

इंडियन ऑयल ने अपने बचाव में कहा कि देशभर के 27 राज्यों से लिए गए 893 नमूनों (जिनमें कर्नाटक के 56 नमूने भी शामिल हैं) की जांच की गई है। इन सभी नमूनों में एथेनॉल का स्तर 19% से 21% के बीच ही पाया गया है, जो निर्धारित मानक (BIS IS 17021) के बिल्कुल अनुरूप है।

आगे क्या होगा?

तेल कंपनियों ने राज्य सरकार को एक संयुक्त और पारदर्शी परीक्षण का प्रस्ताव दिया है। कंपनियों का कहना है कि वे गुणवत्ता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और ग्राहकों को केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करना चाहिए। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस संयुक्त जांच के प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है।

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