भारत से युद्ध में पाकिस्तान का समर्थन करें यहूदी , धर्मगुरु के जहरीले बयान पर भड़के भारतीय
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इजरायली-अमेरिकी रब्बी योसेफ मिजराची का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में रब्बी ने भारत के खिलाफ जहर उगलते हुए दावा किया है कि यदि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध होता है, तो यहूदियों को बिना किसी संकोच के पाकिस्तान का पक्ष लेना चाहिए।

मूर्तिपूजा बनाम एकेश्वरवाद का तर्क

रब्बी ने अपने कट्टरपंथी विचारों को तोराह (यहूदी धर्मग्रंथ) से जोड़ते हुए यह अजीबोगरीब तर्क दिया है। उन्होंने कहा कि भले ही पाकिस्तान इजरायल का दुश्मन है और भारत के साथ हमारे रणनीतिक संबंध हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टिकोण से यहूदी एकेश्वरवाद (एक ईश्वर की इबादत) के कारण पाकिस्तान को चुनेंगे। रब्बी के अनुसार, भारत में होने वाली मूर्तिपूजा उनके धार्मिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

भारतीयों का करारा जवाब

सोशल मीडिया पर इस बयान के सामने आते ही भारतीय यूजर्स ने रब्बी की जमकर क्लास लगाई है। एक यूजर ने सवाल उठाया, अगर रब्बी की सोच ऐसी है, तो फिर भारत और इजरायल की दोस्ती का क्या मतलब?

वहीं, कई अन्य यूजर्स ने रब्बी के विचारों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की संकीर्ण मानसिकता है। एक यूजर ने लिखा, मैंने इजरायल के लोगों से हमेशा भारत के प्रति प्यार और सम्मान ही पाया है। इस रब्बी की बातों से पूरी इजरायली जनता का आकलन नहीं किया जा सकता।

होलोकॉस्ट विवाद और रब्बी का इतिहास

यह पहली बार नहीं है जब योसेफ मिजराची विवादों में घिरे हैं। इससे पहले भी वे हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं और गाय से जुड़ी परंपराओं का अपमान कर चुके हैं। अक्टूबर में उन्होंने हिंदू धर्म पर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए गौमूत्र को लेकर विवादित बयान दिया था।

गौर करने वाली बात यह है कि रब्बी का इतिहास होलोकॉस्ट (यहूदियों के नरसंहार) को नकारने और विवादास्पद बयानों का रहा है। जानकारों का कहना है कि रब्बी जैसे लोग समाज में नफरत फैलाने के लिए धर्म के नाम का इस्तेमाल करते हैं और उनका यह रुख अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संबंधों की हकीकत से कोसों दूर है।

कूटनीति के आगे धार्मिक कट्टरता?

रब्बी के इस बयान ने एक पुरानी बहस को फिर हवा दे दी है: क्या धार्मिक कट्टरता राजनीतिक गठबंधनों को प्रभावित कर सकती है? भारत और इजरायल के बीच हथियारों के सौदे, तकनीक और खुफिया सहयोग के मजबूत स्तंभ मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रब्बी जैसे हाशिए के लोगों के बयानों का असर इन गहरे कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ने की संभावना न के बराबर है।

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