ललन सिंह का राहुल गांधी पर पलटवार: तथ्यों को तोड़ना आपकी पीएचडी , डीबीटी और वोटर कार्ड पर क्या बोले केंद्रीय मंत्री?
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पटना: केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह ने राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर तीखा हमला बोला है। लाभार्थियों के भुगतान के लिए बायोमेट्रिक और वोटर आईडी (EPIC) के इस्तेमाल संबंधी बयान पर उपजे विवाद के बाद ललन सिंह ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

राहुल की आत्मा व्याकुल है, तथ्यों से खिलवाड़ करते हैं ललन सिंह ने राहुल गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि राहुल को तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने में महारत हासिल है, जिस पर उन्हें पीएचडी की डिग्री भी मिल सकती है। उन्होंने राहुल के दावों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि कांग्रेस नेता पूरी बात समझे बिना केवल अपनी सुविधा के अनुसार बयानबाजी कर रहे हैं।

सिर्फ आधार नहीं, पारदर्शिता है लक्ष्य केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए आधार के साथ बायोमेट्रिक और एपिक नंबर को जोड़ा गया है। उन्होंने कहा, यह मोदी सरकार है। अगर किसी लाभार्थी को 100 रुपये मिलने हैं, तो डीबीटी के माध्यम से उसे पूरे 100 रुपये मिलते हैं। हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि कोई बिचौलिया सरकारी धन न खा सके।

कांग्रेस राज की याद दिलाई ललन सिंह ने पुराने दिनों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी को उनके पिता (राजीव गांधी) का चर्चित बयान याद दिलाया। उन्होंने कहा कि पूर्व में कांग्रेस की सरकार के दौरान ही यह स्वीकार किया गया था कि दिल्ली से भेजे गए 100 रुपये में से 90 रुपये बिचौलिये डकार जाते थे। उन्होंने कटाक्ष किया कि राहुल गांधी हर बात को एसआईआर (SIR) के साथ जोड़कर भ्रम फैला रहे हैं।

राहुल गांधी ने क्या लगाया था आरोप? इससे पहले राहुल गांधी ने ललन सिंह का वीडियो साझा करते हुए इसे एक गहरी साजिश करार दिया था। राहुल ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार वोटर लिस्ट से उन लोगों के नाम काट रही है जो बीजेपी के खिलाफ हैं। उन्होंने दावा किया कि अब वोटर लिस्ट के जरिए यह तय किया जाएगा कि किसे सरकारी योजना का पैसा मिलेगा और किसे नहीं, जो सीधे तौर पर वोट चोरी की तैयारी है।

विवाद की जड़ क्या है? विवाद की शुरुआत तब हुई जब ललन सिंह ने प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना के संदर्भ में यह संकेत दिया था कि भविष्य में लाभार्थियों की पहचान के लिए बायोमेट्रिक और वोटर आईडी डेटा का उपयोग किया जाएगा। राहुल गांधी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और चुनावी धांधली से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार इसे बिचौलिया-मुक्त और पारदर्शी वितरण प्रणाली बता रही है।

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