रांची: आदिवासी नेत्री निशा भगत के असमय निधन ने झारखंड की राजनीति में भूचाल ला दिया है। निशा द्वारा अपने अंतिम वीडियो संदेश में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की पर लगाए गए आरोपों ने पूरे राज्य में आक्रोश पैदा कर दिया है। राजनीतिक दलों ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बाबूलाल मरांडी की इस्तीफे की मांग भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने निशा भगत के आरोपों को अत्यंत गंभीर करार दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नैतिक आधार पर इस्तीफा देने की मांग की और कहा कि निशा का अंतिम संदेश राज्य सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की पुरजोर वकालत की है।
जयराम महतो ने की SIT और CBI जांच की अपील जेएलकेएम प्रमुख जयराम महतो ने निशा की मौत पर गहरा दुख जताया। उन्होंने सवाल उठाया कि निशा ने जब थानेदार को फोन कर मदद मांगी, तो उनकी पुकार अनसुनी क्यों की गई? महतो ने पूरे मामले की एसआईटी (SIT) गठन के साथ-साथ सीबीआई (CBI) जांच की मांग की है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके।
भाजपा नेताओं का सरकार पर तीखा हमला केंद्रीय मंत्री संजय सेठ, सांसद निशिकांत दुबे और अमर कुमार बाउरी जैसे नेताओं ने इसे आदिवासी समाज के अपमान से जोड़ दिया है। निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि इस मामले में लीपापोती की जा सकती है। भाजपा नेताओं ने पिठोरिया थाना प्रभारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं और इसे आदिवासी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया है।
सीता सोरेन और चंपई सोरेन ने जताई संवेदना पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन और सीता सोरेन ने भी इस घटना पर चिंता व्यक्त की है। सीता सोरेन ने कहा कि एक आदिवासी बेटी का इस तरह से मजबूर होकर जान देना पूरे समाज और प्रशासनिक ढांचे पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने सरकार से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
जांच की राह और बढ़ते सवाल इस मामले में अब तक की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि झारखंड में आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जे, पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अराजकता के मुद्दे हावी हो गए हैं। हालांकि, सभी आरोप अभी तक प्रारंभिक हैं। मामले की निष्पक्षता जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्षों के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि निशा भगत को आत्महत्या के लिए उकसाने के पीछे की असली सच्चाई क्या है।
*जनजातीय समाज के हक-अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली और समाज की मुखर आवाज रही युवा नेत्री निशा भगत के आत्महत्या की जानकारी मिली है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM, पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की को जिम्मेवार ठहराया है।
— Babulal Marandi (@yourBabulal) November 6, 2026
मुख्यमंत्री के इशारे पर कुछ दलालों द्वारा… pic.twitter.com/pANSZPTeuR
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