दिवाली-छठ की स्पेशल ट्रेनों का गणित : आखिर कहां से आते हैं कोच और कौन लेता है फैसले?
News Image

त्योहारी सीजन में घर जाने की होड़ मची है। दशहरे के बाद अब दिवाली और छठ के लिए भारतीय रेलवे ने स्पेशल ट्रेनों की झड़ी लगा दी है। 13 अक्टूबर 2026 तक जारी आंकड़ों के अनुसार, रेलवे 8,454 स्पेशल फेरे (trips) संचालित कर रहा है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि इन ट्रेनों का फैसला कौन लेता है और अचानक इतनी भारी संख्या में कोच कहां से आते हैं?

फैसले की प्रक्रिया: बोर्ड बनाम जोनल रेलवे इन ट्रेनों का संचालन दो स्तरों पर होता है। रेलवे बोर्ड सबसे पहले कुल स्पेशल फेरों की संख्या और उनकी अवधि को मंजूरी देता है। इसके बाद जोनल रेलवे का काम शुरू होता है, जो समय-सारणी, परिचालन और चलने के दिनों का निर्धारण करते हैं।

रेलवे ट्रैफिक पैटर्न और यात्री दबाव की निरंतर निगरानी करता है। यदि किसी रूट पर यात्री संख्या उम्मीद से कम रहती है, तो फेरे रद्द भी किए जा सकते हैं। ऐसी स्थिति में क्रू और रैक को तुरंत दूसरी सेवाओं में लगा दिया जाता है, ताकि रेलवे को आर्थिक नुकसान न हो।

फेरा और ट्रेन में अंतर आंकड़ों को समझना जरूरी है। उदाहरण के लिए, यदि किसी जोन में 1,000 फेरे दिखाए जा रहे हैं, तो इसका मतलब 1,000 अलग ट्रेनें नहीं हैं। असल में, सीमित संख्या में ट्रेनें अपनी अलग-अलग फ्रीक्वेंसी पर बार-बार चक्कर लगाती हैं। यह एक चक्र है जो मांग के अनुसार चलता रहता है।

कोच और रैक का अदृश्य स्टॉक रेलवे के पास त्योहारों के लिए कोई अलग से स्पेशल स्टॉक नहीं होता। रैक जुटाने के तीन मुख्य तरीके हैं:

  1. सुरक्षित रखे गए कोच: रेलवे बोर्ड जोनल अधिकारियों को निर्देश देता है कि चुनाव, समर स्पेशल या अन्य आयोजनों से खाली हुए रैक को स्टोर करके रखा जाए। विशेष रूप से वे कोच जो रखरखाव (maintenance) के मानकों पर खरे उतरते हैं, उन्हें त्योहारों के लिए आरक्षित रखा जाता है।

  2. एक रैक, कई फेरे: एक ही रैक को बार-बार इस्तेमाल किया जाता है। एक ट्रेन गंतव्य तक जाती है, वहां से खाली होकर या यात्रियों को लेकर वापस आती है, और फिर अगले फेरे के लिए तैयार हो जाती है। 2017 के आंकड़ों के अनुसार, मात्र 55 अतिरिक्त रैक से 4,000 स्पेशल फेरे पूरे किए गए थे।

  3. मौजूदा ट्रेनों में विस्तार: स्पेशल ट्रेनों के अलावा, रेलवे मांग के अनुसार नियमित ट्रेनों में भी अतिरिक्त जनरल कोच जोड़ता है। पिछले साल करीब 108 ट्रेनों में अतिरिक्त कोच जोड़कर यात्री क्षमता बढ़ाई गई थी।

समीक्षा का वॉर रूम त्योहारी सीजन में भारतीय रेलवे पूरी तरह हाई-अलर्ट पर रहता है। खुद रेल मंत्री रेलवे बोर्ड के वॉर रूम से यात्री आवाजाही और ट्रेनों की स्थिति पर नजर रखते हैं। यह पूरा ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि कम संसाधनों में भी अधिक से अधिक यात्रियों को उनके घर तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

जमीन के 20 मीटर नीचे गूंज रहा विकास: इंदौर मेट्रो की अंडरग्राउंड टनल देख हैरान रह गए कैलाश विजयवर्गीय

Story 1

काशी की नई पहचान: भारत का पहला पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे, 45 मिनट का सफर अब सिर्फ 15 मिनट में

Story 1

सिनेमा जगत में रामायण का जलवा: रणबीर-यश की फिल्म देख भावुक हुए बादशाह, दिग्गजों ने की जमकर तारीफ

Story 1

मैं नाराज फूफा नहीं, शांत फूफा हूं : जयपुर में अश्विनी वैष्णव का मजाकिया अंदाज

Story 1

रामायण बनी भारतीय सिनेमा का नया गौरव, एटली ने नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी की जमकर की तारीफ

Story 1

वेलिंगटन एयरपोर्ट पर विराट कोहली का ग्रैंड वेलकम: फैंस ने बर्थडे सॉन्ग गाकर बनाया यादगार

Story 1

पंजाब में पहली बार UZI गन का जखीरा बरामद, अमृतसर में नार्को-टेरर नेटवर्क का भंडाफोड़

Story 1

UGC के जातिगत भेदभाव नियमों पर फिर मंथन: केंद्र सरकार बनाएगी विशेष कमेटी

Story 1

क्या भारत विरोधी बयानबाजी और टूटे वादों ने ट्रंप की पार्टी को चुनाव में हराया?

Story 1

दिवाली से पहले दम घोंट रही दिल्ली की हवा; GRAP-II लागू, AQI 450 के पार