राहुल के एक इशारे पर भारत में बांग्लादेश जैसे हालात : इरफान अंसारी के बयान से सियासी बवाल
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झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी का एक बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चेतावनी देते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की है, जिससे कांग्रेस और भाजपा के बीच तनातनी बढ़ गई है।

पीएम सचेत हो जाएं, वरना भुगतना होगा अंजाम इरफान अंसारी ने गुरुवार को एक विवादित बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को समय रहते सचेत हो जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि स्थिति नहीं बदली, तो भारत के हालात बांग्लादेश और नेपाल जैसे हो जाएंगे, बल्कि उससे भी बदतर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

राहुल गांधी के आदेश का इंतजार कर रहे 40 लाख युवा अंसारी ने कहा कि देश का युवा आज राहुल गांधी के साथ खड़ा है। उन्होंने दावा किया कि 40 लाख युवा पूरी तरह तैयार हैं और उन्हें बस राहुल गांधी के एक इशारे का इंतजार है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, इन युवाओं को रोकने के लिए आप कितनी सेना बुलाएंगे? राहुल गांधी ने फिलहाल उन्हें रोक कर रखा है।

सरकार पर हमला और आपातकाल की चेतावनी कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार में दलित, किसान, छात्र और मध्यम वर्ग बुरी तरह परेशान है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीएम ने स्थिति की गंभीरता को नहीं समझा, तो देश में आपात स्थिति जैसे हालात पैदा हो जाएंगे। उन्होंने मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम काटे जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए और इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।

विपक्ष का मोर्चा: चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन इरफान अंसारी के इस बयान के बीच, बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में इंडिया गठबंधन ने भी जोरदार प्रदर्शन किया। यह विरोध मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ था।

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है। बेंगलुरु का यह प्रदर्शन दिल्ली के रामलीला मैदान में हुए देशव्यापी आंदोलन की अगली कड़ी है, जिसमें कांग्रेस के बड़े नेताओं और मंत्रियों ने हिस्सा लिया।

बयान पर छिड़ी बहस अंसारी के इस बयान पर कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सफाई देते हुए कहा है कि भारत की तुलना नेपाल से नहीं की जा सकती। वहीं, भाजपा की ओर से इस बयान को बेहद भड़काऊ और देश की स्थिरता के खिलाफ बताया जा रहा है। चुनाव के माहौल में नेताओं के ऐसे तीखे बयानों ने राजनीतिक पारा काफी बढ़ा दिया है।

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