भारत-न्यूजीलैंड FTA लागू: अब भारतीयों के लिए खुले रोजगार और पढ़ाई के नए रास्ते
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भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक ऐतिहासिक बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। दोनों देशों के बीच हुआ व्यापक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। यह समझौता न केवल व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा, बल्कि भारतीय पेशेवरों, छात्रों और निर्यातकों के लिए अवसरों का एक नया द्वार खोलेगा।

FTA से भारतीय निर्यात को मिली बड़ी राहत

इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड ने अपने बाजार में आने वाले 100% भारतीय निर्यात पर सभी प्रकार के करों (टैरिफ) को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इससे टेक्सटाइल, चमड़ा, जूते-चप्पल, रत्न-आभूषण और इंजीनियरिंग उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में भारतीय कंपनियां अब कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर बेच सकेंगी। यह भारत के छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए एक बड़ा अवसर है।

युवाओं और पेशेवरों के लिए वर्क वीजा का तोहफा

समझौते के अंतर्गत एक नया टेम्परेरी एम्प्लॉयमेंट एंट्री वीजा शुरू किया गया है। इसके तहत:

छात्रों के लिए शिक्षा और काम के बेहतर अवसर

पढ़ाई के बाद न्यूजीलैंड में बसने की चाहत रखने वाले भारतीय छात्रों के लिए भी यह समझौता बेहद फायदेमंद है। न्यूजीलैंड में भारतीय छात्रों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी। साथ ही, STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) ग्रेजुएट्स को पढ़ाई पूरी करने के बाद 3 साल तक और PhD स्कॉलर्स को 4 साल तक वहां रहकर काम करने की सुविधा मिलेगी।

भारत ने क्यों बचाई अपनी डेयरी इंडस्ट्री?

इस समझौते में भारत ने अपने किसानों के हितों की रक्षा के लिए रेड लाइन खींची है। दूध और पनीर जैसे डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से इस समझौते से बाहर रखा गया है। इसके अलावा कॉफी, चीनी, प्याज, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों पर भी कोई शुल्क छूट नहीं दी गई है ताकि स्थानीय छोटे व्यवसायों और लाखों किसानों की आजीविका सुरक्षित रहे।

न्यूजीलैंड का बड़ा निवेश और व्यापारिक लाभ

न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर का निवेश करने का वादा किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना है। वहीं, न्यूजीलैंड को अब 1.4 अरब भारतीय ग्राहकों का विशाल बाजार सुलभ हो गया है। न्यूजीलैंड से आने वाले कीवी और सेब पर करों में 50% की कटौती की गई है, जबकि भेड़ का मांस, कोयला और ऊन पर करों को तत्काल हटा दिया गया है।

यह समझौता भारत के उन वैश्विक प्रयासों का हिस्सा है, जिसके तहत सरकार पहले से ही यूके, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और जापान जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक स्तर पर मजबूती दे रही है।

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