उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने एक बड़ा संकेत दिया है। वाराणसी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश ने साफ किया कि वह विधानसभा चुनाव लड़ने के बजाय सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की तैयारी में हैं। उनके इस बयान ने यूपी की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
अखिलेश यादव ने अपनी रणनीति के पीछे 2012 के चुनाव का उदाहरण दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि जब वह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे, तब उन्होंने विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था। अब 2027 में भी वह इसी शुभ पैटर्न को दोहराना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक फैसला नहीं, बल्कि सपा की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
इस फैसले के जरिए अखिलेश ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वे 2027 में मुख्यमंत्री पद के एकमात्र दावेदार और पार्टी के मुख्य रणनीतिकार हैं। चुनाव न लड़कर, वे खुद को किसी एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित करने के बजाय पूरे राज्य में प्रचार और संगठन की मजबूती पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत, कोई भी व्यक्ति विधायक या विधान परिषद का सदस्य न होने पर भी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकता है। हालांकि, उन्हें शपथ लेने के छह महीने के भीतर राज्य के विधानमंडल (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। अखिलेश 2012 में भी इसी प्रक्रिया के तहत पहले सीएम बने और बाद में विधान परिषद के सदस्य चुने गए थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि केवल चुनाव न लड़ना जीत की गारंटी नहीं है। सपा के लिए 2027 का चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण है। 2022 में 111 सीटें जीतने के बावजूद सत्ता से दूर रहने वाली समाजवादी पार्टी के लिए अब संगठन की मजबूती, सही उम्मीदवारों का चयन और जातीय समीकरणों को साधने पर ही उनकी जीत का दारोमदार टिका है।
अखिलेश का यह कदम उन्हें पूरी तरह से प्रचार की कमान संभालने की आजादी देगा, लेकिन क्या यह दांव 2012 जैसा परिणाम ला पाएगा, यह तो समय ही बताएगा।
*जिनकी ख़ुद की टिकट उनके अपने ही पड़ोसी पक्की नहीं होने दे रहे हैं, वो चुप ही रहें तो ही उनका सम्मान बचा रहेगा।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) November 4, 2026
उन्होंने जो टीका-टिप्पणी की है वो भी किसी ‘दुष्मुखी’ के वचनों से प्रेरित लगती है। भगवान कृष्ण के एक अन्य परमार्थी नाम ‘रणछोड़’ को नकारात्मक भाव में प्रयुक्त करके… pic.twitter.com/L5RtIed678
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