केश्म द्वीप बना जंग का नया अखाड़ा मिडटर्म चुनाव के मतदान के बीच ईरान के केश्म द्वीप पर बीती रात पांच बड़े धमाके हुए। अमेरिकी वायुसेना के फाइटर जेट्स ने इस द्वीप पर बने ईरान के मिसाइल लॉन्चरों, रडार और एयर डिफेंस साइट्स को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा अमेरिकी विमान पर मिसाइल दागने के जवाब में की गई है।
होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की पकड़ ढीली करने की कोशिश केश्म द्वीप फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा और रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। यहाँ की सुरंगों और नमक की गुफाओं में ईरान ने अंडरग्राउंड मिसाइल सिस्टम और तेज हमला करने वाली बोट्स छिपा रखी हैं। इस द्वीप से ईरान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को नियंत्रित करता है। अमेरिका का लक्ष्य इसी ताकत को खत्म करना है।
ईरान का पलटवार: अमेरिकी ड्रोन कब्जे में ईरान भी चुप नहीं बैठा। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक के जरिए अमेरिका के दो MQM-170 ड्रोन्स को जाम कर कब्जे में ले लिया है। इसके साथ ही, एक MQ9 रीपर ड्रोन को मार गिराने का भी दावा किया गया है। यह स्पष्ट है कि दोनों देश एक-दूसरे के सैन्य तंत्र को निशाना बनाने के लिए पूरी तरह तैयार थे।
कूटनीति बनाम आक्रामकता: ट्रंप का दोहरा खेल? हमले से ठीक एक दिन पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान पर हमला नहीं करेंगे और समझौते के संकेत दिए थे। ईरान के सर्वोच्च नेता के प्रतिनिधि मोजतबा खामेनेई ने भी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन को वार्ता के लिए विशेष अधिकार दिए थे। आर्थिक दबाव और अमेरिकी-इजराइली रुख को देखते हुए ईरान सुलह के रास्ते पर था, लेकिन चुनाव के बीच इस हमले ने पूरे समीकरण बदल दिए हैं।
क्या चुनाव के बाद परमाणु हमले की तैयारी है? अमेरिकी राजनीतिक विश्लेषक टकर कार्लसन ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनके अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भारी दबाव में ट्रंप प्रशासन मिडटर्म के बाद ईरान के नतांज स्थित पिकैक्स माउंटेन पर परमाणु हमला कर सकता है। कार्लसन का तर्क है कि पारंपरिक हथियार ईरान के पहाड़ों में छिपे परमाणु केंद्रों को भेदने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए परमाणु विकल्प ही एकमात्र रास्ता बचा है।
चुनाव और युद्ध का गणित मिडटर्म चुनाव के दौरान यह हमला महज एक संयोग नहीं है। ट्रंप शायद उन वोटर्स को संदेश देना चाहते हैं जो ईरान को अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा मानते हैं। वोटिंग डे पर यह हमला ट्रंप की वोट एंड वॉर रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, कार्लसन के परमाणु हमले वाले दावे ने पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब सबकी निगाहें 7 नवंबर पर टिकी हैं, जो इस तनावपूर्ण स्थिति का निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।
#DNAमित्रों | ईरान पर अटैक से वोट बढ़ेंगे या घटेंगे? ट्रंप ने वोटिंग डे पर हमला क्यों किया ?
— Zee News (@ZeeNews) November 3, 2026
अमेरिका के वोट एंड वॉर का DNA टेस्ट#DNA #DNAWithRahulSinha #Iran #IranUSAWar #DonaldTrump@rahulsinhatv pic.twitter.com/RNSTCj4JGL
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