उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। औरैया में दिए गए एक भाषण के बाद मौलाना जरजिस अंसारी चर्चाओं में हैं। 29 अक्टूबर को दिए गए उनके भाषण का वीडियो 2 नवंबर को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भड़काऊ टिप्पणी की है।
अपने संबोधन में मौलाना ने उत्तर प्रदेश के मुसलमानों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने दावा किया कि यदि 2027 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार फिर से सत्ता में आती है, तो प्रदेश के मुसलमानों पर संकट आएगा। उन्होंने आशंका जताई कि उनके घरों पर बुलडोजर चलाए जा सकते हैं और उन्हें आग के हवाले किया जा सकता है।
मौलाना ने अपने भाषण में फिलिस्तीन के हालात और 2002 के गुजरात दंगों का हवाला दिया। उन्होंने इन घटनाओं के जरिए समुदाय के बीच डर पैदा करने की कोशिश की और इसे एकजुट होने का आधार बताया। हालांकि, उनके इस बयान पर न केवल भाजपा ने बल्कि स्वयं मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी कड़ी आपत्ति जताई है।
मौलाना जरजिस अंसारी एक धार्मिक वक्ता हैं, जो अक्सर इस्लाम और समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं। यह पहली बार नहीं है जब वे विवादों में हैं। इससे पहले जुलाई में भी उन पर हिंदू देवी-देवताओं पर कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे थे। उनके भाषण अक्सर समुदाय को राजनीतिक दिशा देने के नाम पर विवादों को जन्म देते रहे हैं।
भाजपा नेताओं ने इस बयान को डर की राजनीति करार दिया है। उनका आरोप है कि चुनाव नजदीक आते ही मौलाना जैसे लोग मुस्लिम समुदाय में असुरक्षा की भावना पैदा कर धार्मिक भावनाओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।
वहीं, समाजवादी पार्टी ने मौलाना के बयान से दूरी बना ली है। सपा प्रवक्ता दीपक रंजन ने इसे मौलाना की निजी राय बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, हालांकि उन्होंने योगी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठाए।
मौलाना जरजिस अंसारी का विरोध केवल राजनीतिक गलियारों तक ही सीमित नहीं रहा। कई प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने उत्तर प्रदेश की तुलना फिलिस्तीन से करने को गलत बताया है।
2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले यह बयान प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ले आया है। भाजपा इसे विपक्ष की तुष्टिकरण और विभाजन की राजनीति के प्रमाण के रूप में देख रही है, वहीं जानकार मानते हैं कि इस तरह की बयानबाजी आने वाले समय में समाज के ध्रुवीकरण को और तेज कर सकती है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर कानूनी कार्रवाई होती है या यह केवल राजनीतिक शोर तक सीमित रहता है।
*🚨 “सरकार दोबारा आई तो घर जलेंगे, बुलडोजर चलेंगे!” मौलाना के बयान से मचा सियासी घमासान
— amarshah (Journalist (@amargkp_shah) November 2, 2026
इटावा के मौलाना जर्जिस अंसारी का विवादित बयान, चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल!
#MaulanaJarjisAnsari #DhurandharAmishOnNavBharat
MY VOTE IS FOR SCOUT#Deepotsav_Ka_Dashak pic.twitter.com/5oB1Y6AzjZ
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