साइबर अटैक और ड्रोन का काल बनेगा CISF का नया चक्रव्यूह: 1 नवंबर से 6 सुपर स्पेशलाइज्ड सेक्टर्स ने संभाला मोर्चा
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आज के दौर में जंग सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है। दुश्मन अब बिना सरहद पार किए ही पावर प्लांट, तेल रिफाइनरी या मेट्रो जैसे महत्वपूर्ण ठिकानों को एक झटके में ठप करने की ताकत रखता है। इन आधुनिक खतरों को देखते हुए CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) ने अपनी सुरक्षा रणनीति में एक बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव किया है।

पुराने ढर्रे से मुक्ति: अब इलाका नहीं, तकनीक तय करेगी सुरक्षा 1 नवंबर से CISF ने अपनी पुरानी इलाका आधारित (Territorial) व्यवस्था को खत्म कर दिया है। अब इसकी जगह फंक्शनल कमांड (Functional Command) सिस्टम को लागू किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि अब सुरक्षा का खाका भौगोलिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि प्रतिष्ठान की जरूरतों और उसकी तकनीकी प्रकृति के आधार पर तैयार किया जाएगा।

क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत? पहले एक ही सेक्टर हेडक्वार्टर को कोयला खदानों से लेकर हाई-टेक पोर्ट्स तक की जिम्मेदारी निभानी पड़ती थी। एक अधिकारी के लिए हर इंडस्ट्री की अलग तकनीकी बारीकियों को समझना मुश्किल होता था। अब, विशेषज्ञों की कमान में सुरक्षा बल ड्रोन अटैक, साइबर स्ट्राइक और औद्योगिक तोड़फोड़ जैसे खतरों से अधिक सटीकता से निपट सकेंगे।

नए सुपर स्पेशलाइज्ड सेक्टर का ढांचा CISF ने अब पूरे भारत में सुरक्षा को निम्नलिखित 6 विशेष सेक्टर्स में बांट दिया है:

क्या आम लोगों पर पड़ेगा कोई असर? CISF ने स्पष्ट किया है कि इस बड़े बदलाव का असर जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों या सामान्य लोगों पर नहीं पड़ेगा। गेट पर होने वाली चेकिंग, पेट्रोलिंग और क्विक रिएक्शन टीम (QRT) की तैनाती पहले की तरह ही जारी रहेगी। यह बदलाव पूरी तरह से सुपरविजन और डिसीजन मेकिंग के स्तर पर है, ताकि इमरजेंसी की स्थिति में तुरंत सटीक फैसला लिया जा सके।

DG ने बताया इसे गेम-चेंजर CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन के अनुसार, यह नया ढांचा मल्टी-स्टेकहोल्डर माहौल में गेम-चेंजर साबित होगा। उन्होंने बताया कि अब इंडस्ट्री मैनेजमेंट के साथ तालमेल बिठाना आसान होगा, क्योंकि अब हर सेक्टर के लिए एक सिंगल पॉइंट ऑफ कॉन्टैक्ट उपलब्ध है। तकनीकी समझ रखने वाली लीडरशिप का होना अब इमरजेंसी रिस्पॉन्स को पहले से कहीं ज्यादा तेज और प्रभावी बना देगा।

यह बदलाव CISF को सिर्फ एक पहरेदार फोर्स से हटाकर एक टेक-स्मार्ट और इंटेलिजेंस-बेस्ड सुरक्षा एजेंसी के रूप में स्थापित करेगा, जो भारत की औद्योगिक प्रगति की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।

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