गोरखपुर AIIMS की चिकित्सा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। संस्थान की कार्यकारी निदेशक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) डॉ. विभा दत्ता की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद जो स्थिति सामने आई, उसने दावों की पोल खोल दी है। हृदय संबंधी जांच के लिए उन्हें अपने ही संस्थान की जगह एक निजी अस्पताल का रुख करना पड़ा।
निजी अस्पताल की शरण में निदेशक बुधवार को डॉ. विभा दत्ता की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले AIIMS में भर्ती कराया गया। लेकिन, दिल की जांच के लिए जरूरी कैथ लैब की सुविधा वहां उपलब्ध नहीं थी। मजबूरन उन्हें इलाज के लिए शहर के एक निजी अस्पताल ले जाना पड़ा। करीब आधे घंटे तक बाहर रहने के बाद वह वापस लौटीं। इस घटना ने एक बड़े सवाल को जन्म दिया है कि जब संस्थान की मुखिया ही अपने अस्पताल में सुरक्षित नहीं, तो आम मरीजों का क्या होगा?
7 साल बाद भी क्यों अधूरी है कैथ लैब? गोरखपुर AIIMS को स्थापित हुए सात साल बीत चुके हैं। पूर्वांचल के साथ-साथ बिहार के सीमावर्ती जिलों के मरीज भी उम्मीद लेकर यहां आते हैं। इसके बावजूद, आधुनिक चिकित्सा की रीढ़ माने जाने वाली कैथ लैब का अब तक चालू न होना बड़ी प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। इतने वर्षों में बुनियादी संसाधनों का अभाव लोगों को सरकारी व्यवस्था पर सोचने के लिए मजबूर कर रहा है।
अखिलेश और चंद्रशेखर आजाद का हमला इस पूरे प्रकरण ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, भाजपा राज में AIIMS को भी इलाज की ज़रूरत है। उन्होंने इसे अंधेर नगरी करार देते हुए प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य दावों को झूठा प्रचार बताया।
वहीं, सांसद चंद्रशेखर आजाद ने भी हमला बोला। उन्होंने लिखा, घर में ही अंधेरा है और दुनिया को रोशनी दिखाने चले हैं। आजाद के अनुसार, AIIMS निदेशक का बाहर इलाज कराना सरकार की लचर स्वास्थ्य सेवा का सबसे बड़ा प्रमाण है।
सुधार की दरकार यह घटना सिर्फ एक तकनीकी चूक नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है। एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं के अभाव में खुद संस्थान के अधिकारी परेशान हैं। अब देखना यह है कि इस घटना के बाद प्रशासन नींद से जागता है या फिर कैथ लैब का इंतजार और लंबा होता है।
*घर में ही अंधेरा है और दुनिया को रोशनी दिखाने चले हैं!
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) October 30, 2026
मैं पूरे प्रदेश में लगातार घूम-घूम कर, यूपी की महान जनता से यह ही कह रहा हूं कि स्वास्थ्य सेवाएं अच्छी नही है। उदाहरण आपके सामने है।
AIIMS की निदेशक को ही अपने संस्थान में इलाज नहीं मिल पाना सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था की… pic.twitter.com/xHq9oXC0Hs
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