मणिपुर में सियासी भूचाल: पूर्व CM बीरेन सिंह का दावा- मेरे ही नेताओं ने कांग्रेस के साथ मिलकर रची साजिश
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मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने अपनी ही पार्टी बीजेपी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाकर राज्य की राजनीति में खलबली मचा दी है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने दावा किया कि उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए राज्य के ही कुछ बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा था।

मुझे CM के रूप में स्वीकार नहीं कर पाए पार्टी के ही नेता बीरेन सिंह ने कहा कि 2017 में जब उन्होंने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामा और मुख्यमंत्री बने, तो पार्टी के कुछ नेता इसे पचा नहीं पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं के लिए बीजेपी उनकी निजी जागीर थी, और वे उन्हें अपना नेता मानने को तैयार नहीं थे। बीरेन सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस साजिश के लिए राज्य इकाई के कुछ नेताओं से दिक्कत है, न कि केंद्रीय नेतृत्व से।

मेरे इस्तीफे के बाद भी हिंसा क्यों नहीं रुकी? बीरेन सिंह ने उन दावों पर सवाल खड़े किए हैं जिनमें कहा गया था कि उनके हटने से मणिपुर में शांति आ जाएगी। उन्होंने पूछा, मेरे हटने के बाद भी हिंसा जारी है, नागा और कुकी समुदायों के लोग मारे जा रहे हैं, तो अब इसके लिए कौन जिम्मेदार है? उन्होंने यूरोपीय संघ द्वारा मणिपुर हिंसा पर की गई पूर्व की टिप्पणियों का जिक्र करते हुए उन पर तंज भी कसा।

ड्रग्स और अवैध प्रवासियों के मुद्दे पर सरकार को घेरा मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बीजेपी को जनता का खोया हुआ भरोसा वापस पाना होगा। बीरेन सिंह ने मांग की है कि उनके कार्यकाल में शुरू किए गए ड्रग्स विरोधी अभियान और अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई जारी रहनी चाहिए। उन्होंने अवैध प्रवासियों की बायोमेट्रिक पहचान के काम को भी राज्य के भविष्य के लिए अनिवार्य बताया।

चुनाव से पहले BJP के लिए बढ़ी चुनौती मणिपुर में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर बीरेन सिंह ने पार्टी के लिए चिंता जताई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य को बचाना है, तो बीजेपी को सत्ता में वापस लाना आवश्यक है। उन्होंने परोक्ष रूप से अपनी लोकप्रियता का दावा करते हुए कहा कि जनता अभी भी उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है।

अधूरे काम और राजनीतिक खींचतान बीरेन सिंह ने माना कि उनके कार्यकाल के अंतिम समय में राज्य में हालात सुधर रहे थे, लेकिन आंतरिक राजनीतिक खींचतान ने सब बिगाड़ दिया। गौरतलब है कि फरवरी 2025 में इस्तीफा देने वाले बीरेन सिंह ने उस वक्त की स्थिति को याद करते हुए कहा कि नेतृत्व परिवर्तन के दबाव के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा था, जिसका खामियाजा अब राज्य की जनता को भुगतना पड़ रहा है।

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