एक्सप्रेसवे पर अब 144 की रफ्तार! नितिन गडकरी के नए ऐलान से बढ़ी सुरक्षा पर बहस
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केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्सप्रेसवे पर गाड़ियों की गति सीमा को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इस घोषणा के बाद से देश में एक नई बहस छिड़ गई है।

क्या है नया नियम? नितिन गडकरी ने साफ़ किया है कि एक्सप्रेसवे पर 120 किमी/घंटा की रफ्तार तक किसी भी वाहन का चालान नहीं काटा जाएगा। इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों को 20 प्रतिशत की बफर छूट देने के निर्देश दिए हैं। इसका मतलब है कि अगर कोई वाहन 120 किमी/घंटा की सीमा से 20 प्रतिशत अधिक गति पर भी चल रहा है, तो उस पर जुर्माना नहीं लगाया जाएगा।

144 किमी/घंटा की रफ्तार पर विवाद इस गणित के हिसाब से, चालक अब बिना चालान के 144 किमी/घंटा तक की गति से वाहन चला सकेंगे। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने इसे लेकर चिंता जताई है। कई लोगों का तर्क है कि भारत की सड़कों की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इतनी तेज रफ्तार जानलेवा साबित हो सकती है।

सुरक्षा को लेकर जनता की शंकाएं सोशल मीडिया पर आम लोगों और विशेषज्ञों ने कड़ा रुख अपनाया है। लोगों का कहना है कि भारतीय एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं, गलत साइड से आने वाले वाहनों और अचानक सामने आने वाली बाधाओं के कारण 144 किमी/घंटा की रफ्तार को नियंत्रित करना असंभव है। कई लोगों ने सलाह दी है कि राजनीतिक बयानों के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 100 किमी/घंटा से नीचे ही गाड़ी चलानी चाहिए।

लेन अनुशासन का मुद्दा बहस के दौरान एक बड़ा मुद्दा लेन अनुशासन का उभरकर सामने आया है। यात्रियों का कहना है कि भारत में समस्या केवल गति नहीं, बल्कि धीमी गति से चलने वाले भारी वाहनों का फास्ट लेन में कब्जा होना है। लोगों की मांग है कि सरकार गति सीमा बढ़ाने से पहले गलत लेन में वाहन चलाने और ओवरटेकिंग के नियमों को सख्ती से लागू करे।

AI से सुधरेगा ट्रैफिक मैनेजमेंट भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि सरकार अब राजमार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए एआई (AI) आधारित एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) पर ध्यान केंद्रित कर रही है। सरकार का उद्देश्य है कि नई तकनीक के जरिए नियमों का उल्लंघन करने वालों की सटीक पहचान की जाए ताकि हादसों को कम किया जा सके और यातायात को व्यवस्थित किया जा सके।

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