पुरानी कड़वाहट भूलें, अब अजनबी नहीं रह सकते : भारत के साथ रिश्ते सुधारने को बेताब तुर्की
News Image

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान का साथ देने के कारण भारत और तुर्की के बीच जो दूरियां बनी थीं, वे अब पिघलती दिख रही हैं। साल भर पहले भारत द्वारा तुर्की के राष्ट्रीय दिवस समारोह का बहिष्कार करने के बाद, इस बार नई दिल्ली ने अपने आधिकारिक प्रतिनिधि को भेजकर कूटनीतिक बर्फ पिघलाने के संकेत दिए हैं।

भारत का रुख: आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस तुर्की के 103वें राष्ट्रीय दिवस समारोह में भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (दक्षिण यूरोप) अल्पना दुबे शामिल हुईं। इस उपस्थिति को दोनों देशों के बीच राजनयिक शिष्टाचार की वापसी माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान अल्पना दुबे ने दो टूक शब्दों में कहा कि आर्थिक सहयोग संबंधों का स्तंभ है, लेकिन भारत आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है।

राजदूत की अपील: अहंकार और संदेह को जला दें तुर्की के राजदूत अली मुरात एर्सोय ने संबंधों में आए इस नए मोड़ को महत्वपूर्ण करार दिया। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि भारत और तुर्की जैसे रणनीतिक साझेदार एक-दूसरे से अजनबी बनकर नहीं रह सकते। एर्सोय ने आपसी सहयोग के लिए जलवायु तकनीक, सिनेमा और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता बनाने का आह्वान किया।

क्यों तनावपूर्ण थे रिश्ते? पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के संबंधों में गहरी खटास थी। तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन द्वारा संयुक्त राष्ट्र में बार-बार कश्मीर का मुद्दा उठाने और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को सैन्य मदद देने से नई दिल्ली नाराज थी। जवाब में, भारत ने पिछले साल तुर्की के राष्ट्रीय दिवस समारोह में अपने किसी भी अधिकारी को नहीं भेजा था।

बदलते समीकरण और वैश्विक राजनीति वर्तमान में स्थिति दिलचस्प है। तुर्की के अपने पुराने सहयोगी अजरबैजान के साथ संबंध खराब चल रहे हैं, वहीं भारत अजरबैजान के साथ अपने आर्थिक हितों को संतुलित करने में जुटा है। हाल ही में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का अजरबैजान दौरा इसी कूटनीतिक संतुलन का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या उम्मीदें हैं? एर्दोगन के हालिया बयानों और रुख में आए बदलाव के बाद, दिल्ली और अंकारा फिर से करीब आ रहे हैं। हालांकि, भारत का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा और आतंकवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अब कोई समझौता नहीं होगा। यह देखना बाकी है कि तुर्की की यह सुधार यात्रा केवल कूटनीतिक दिखावा है या दोनों देश वास्तव में एक नई साझेदारी की नींव रख रहे हैं।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

जेडीयू के पोस्टर से ललन सिंह गायब: क्या अनंत सिंह के बाद अब पार्टी में साइडलाइन होने की बारी?

Story 1

पीएम मोदी के गुजरात दौरे में गूंजे मोदी नहीं जाएंगे के नारे, वीडियो हुआ वायरल

Story 1

भूटान में ग्लेशियर झील फटने से भारत में हाई अलर्ट, बंगाल और असम के सीमावर्ती इलाकों में मची अफरा-तफरी

Story 1

अब गूगल मैप्स की मोहताजी खत्म: ISRO का ‘ब्रह्मास्त्र’ NVS-03 सैटेलाइट भारत के GPS को देगा नई ताकत

Story 1

जामिया में छात्रों की ऐतिहासिक जीत: 18 दिन की भूख हड़ताल के बाद प्रशासन ने घुटने टेके

Story 1

चर्चा में बनासकांठा: पीएम मोदी ने कहा, खाट पर बैठे लोगों का यह दृश्य वर्ल्ड रिकॉर्ड बन सकता था

Story 1

फैक्ट चेक: क्या कंगना रनौत ने करवा चौथ पर PM मोदी के लिए रखा व्रत? वायरल वीडियो का सच जानें

Story 1

केदारनाथ दर्शन पर सारा अली खान को फतवा: मौलाना बोले- यह इस्लाम के खिलाफ है, तौबा करें

Story 1

रावण पूरी तरह बुरा नहीं था : रामायण इवेंट में साई पल्लवी के बयान से मचा बवाल

Story 1

टॉप 10 न्यूज़: चक्रवात का कहर, इज़राइल की चुनावी जंग और देश-दुनिया की बड़ी हलचल