बिहार की सियासत में ब्रदर्स इन आर्म्स : एक ही सदन में साथ दिखेंगे दो सगे एमएलसी भाई
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बिहार विधान परिषद में जल्द ही एक ही परिवार की मजबूत सियासी दस्तक देखने को मिलेगी। पूर्व विधायक और मंत्री रहे रामानंद प्रसाद सिंह के दोनों बेटे, राजीव कुमार और डॉ. संजीव कुमार, अब एक साथ उच्च सदन की शोभा बढ़ाएंगे।

पटना में संजीव कुमार की बड़ी जीत छोटे भाई डॉ. संजीव कुमार ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने बीजेपी के मौजूदा विधान पार्षद नवल किशोर यादव को 1057 वोटों के अंतर से हराया। संजीव कुमार को 4487 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी नवल किशोर यादव 3430 वोटों पर सिमट गए।

मतगणना के दौरान हुआ हंगामा जीत के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार हताश थी। उन्होंने बताया कि मतगणना स्थल पर काफी अफरा-तफरी और हंगामा हुआ, जिससे माहौल तनावपूर्ण रहा।

सियासी संघर्ष और तजुर्बा डॉ. संजीव कुमार का राजनीतिक करियर लंबा रहा है। वो खगड़िया की परबत्ता विधानसभा सीट से जेडीयू के विधायक रह चुके हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने आरजेडी के टिकट पर प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। 2015 में भी उन्होंने विधान परिषद का चुनाव लड़ा था, लेकिन अब पटना शिक्षक सीट से जीत के बाद उनकी सदन में वापसी हुई है।

राजीव कुमार की पहले से है मौजूदगी बड़े भाई राजीव कुमार पहले से ही विधान परिषद के सदस्य हैं। उन्होंने 2022 में कांग्रेस के टिकट पर बेगूसराय-खगड़िया स्थानीय प्राधिकार निर्वाचन क्षेत्र से बीजेपी के कद्दावर नेता रजनीश कुमार को हराकर जीत हासिल की थी। अब दोनों भाई मिलकर सदन में अपने क्षेत्र की आवाज बुलंद करेंगे।

पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे बेटे यह सियासी जोड़ी उनके दिवंगत पिता रामानंद प्रसाद सिंह की विरासत को आगे ले जा रही है। रामानंद प्रसाद सिंह परबत्ता से कई बार विधायक रहे और बिहार सरकार में मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दीं। मई 2025 में उनके निधन के बाद से दोनों बेटे परिवार की राजनीतिक रसूख को राज्य की सत्ता की गलियारों में बनाए रखने में सफल रहे हैं।

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