दिल्ली के व्यापारियों की गुहार और त्योहारों के सीजन के बीच कांग्रेस पार्टी अपने रुख पर अडिग है। तमाम आपत्तियों के बावजूद, कांग्रेस 1 नवंबर को रामलीला मैदान में महारैली आयोजित करने के अपने फैसले पर कायम है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे लेकर मोर्चा संभाल लिया है।
दुकानें बंद होंगी, पर लोकतंत्र बचेगा चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी से रैली को दिवाली के बाद टालने का अनुरोध किया था। व्यापारियों का तर्क था कि दिवाली के दौरान दिल्ली के बाजारों में 25 हजार करोड़ रुपये का कारोबार होता है। रामलीला मैदान के आसपास के बाजारों में भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के कारण व्यापार ठप होने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, राहुल गांधी ने इस अपील को सिरे से खारिज कर दिया है।
वोट चोरी और संविधान बचाने का मार्च राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इस रैली को एक आंदोलन का रूप देने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि यह मार्च किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि हिंदुस्तान की आत्मा का है। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जरूरी कदम बताया।
पुलिस और लाठियों का डर न रखें राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में समर्थकों को निडर रहने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा, पुलिस या लाठियों की चिंता मत करो। बीजेपी की कोई भी चाल कामयाब नहीं होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नरेंद्र मोदी, अमित शाह और अन्य अधिकारियों की नीतियों के खिलाफ एकजुट हों।
छात्रों और युवाओं को न्योता इस रैली को लेकर कांग्रेस ने युवाओं और छात्र संगठनों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है। राहुल गांधी ने कहा कि यदि युवाओं को लगता है कि उनकी अभिव्यक्ति की आजादी और विचारों पर हमला हो रहा है, तो वे विचारधारा से ऊपर उठकर इस मार्च में शामिल हों।
व्यापारिक जगत में चिंता रैली की तारीख तय होने के बाद दिल्ली के व्यापारिक जगत में हलचल तेज है। सुरक्षा कारणों से बाजारों में पाबंदियों और यातायात की समस्या व्यापारियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। CTI की चेतावनी के बावजूद राजनीति का यह शक्ति प्रदर्शन अब 1 नवंबर को ही देखने को मिलेगा।
नमस्कार,
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 29, 2026
चलो दिल्ली रामलीला मार्च, लोकतंत्र को बचाने का, वोट चोरी को रोकने का, संविधान को बचाने का मार्च है।
यह किसी एक राजनीतिक पार्टी का मार्च नहीं - यह हिंदुस्तान की आत्मा का मार्च है।
सब लोग जो नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार से तंग हैं। सब लोग जो लोकतंत्र को बचाना… pic.twitter.com/lH51sK1Dv8
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