बेबाक बोल या विवादों का सिलसिला? नसीरुद्दीन शाह के उन बयानों की पूरी टाइमलाइन, जिसने मचाया सियासी और फिल्मी गलियारों में बवाल
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वरिष्ठ अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए तो चर्चित हैं ही, लेकिन उससे कहीं ज्यादा वे अपने बेबाक बयानों के लिए सुर्खियां बटोरते रहे हैं। देश के सामाजिक, राजनीतिक और सिनेमाई मुद्दों पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखने की आदत ने उन्हें कई बार विवादों के घेरे में खड़ा किया है।

आइये जानते हैं, नसीरुद्दीन शाह की उन विवादित टिप्पणियों की पूरी टाइमलाइन, जिसने समय-समय पर सोशल मीडिया और मीडिया जगत में हलचल पैदा कर दी।

1. अमिताभ बच्चन की शोले पर सवाल (2010)

नसीरुद्दीन शाह ने 2010 में एक इंटरव्यू के दौरान सदी के महानायक अमिताभ बच्चन की फिल्मों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने शोले को महान फिल्म मानने से इनकार कर दिया था। नसीर ने इसे केवल मनोरंजक बताया, जिसके बाद बिग बी के फैंस का गुस्सा फूट पड़ा और उन्हें भारी आलोचना झेलनी पड़ी।

2. राजेश खन्ना को बताया औसत एक्टर (2016)

2016 में नसीरुद्दीन शाह ने 70 के दशक की फिल्मों को औसत बताते हुए सुपरस्टार राजेश खन्ना को औसत दर्जे का अभिनेता करार दिया था। इस बयान से नाराज राजेश खन्ना की बेटी ट्विंकल खन्ना ने सार्वजनिक तौर पर कड़ा विरोध जताया, जिसके बाद अभिनेता को माफी मांगनी पड़ी थी।

3. विराट कोहली को सबसे बदतमीज खिलाड़ी कहा (2018)

नसीरुद्दीन शाह ने विराट कोहली की प्रतिभा को तो सराहा, लेकिन उनके ऑन-फील्ड व्यवहार पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कोहली को दुनिया का सबसे बेहतरीन बल्लेबाज और साथ ही सबसे बुरा व्यवहार करने वाला खिलाड़ी कहा। उन्होंने लिखा कि खेल में उनका प्रदर्शन उनके घमंड और बदतमीजी के आगे फीका पड़ जाता है।

4. अनुपम खेर को कहा जोकर (2020)

2020 में अभिनेता अनुपम खेर पर निशाना साधते हुए नसीर ने उन्हें जोकर तक कह दिया था। इस बयान ने बॉलीवुड के दो दिग्गजों के बीच जुबानी जंग छेड़ दी थी। अनुपम खेर ने पलटवार करते हुए कहा था कि नसीरुद्दीन शाह की पूरी जिंदगी कुंठा (Frustration) में बीती है।

5. द कश्मीर फाइल्स और द केरला स्टोरी पर विवाद (2023)

नसीरुद्दीन शाह ने इन चर्चित फिल्मों को प्रोपेगेंडा और नफरत फैलाने वाली करार दिया था। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर भारी बहस को जन्म दिया और उन्हें जमकर ट्रोल किया गया। कई लोगों ने उनकी मंशा पर सवाल उठाए।

6. छात्र आंदोलनों का समर्थन और दिमागी नक्सली का तमगा (2026)

अक्टूबर 2026 में नसीरुद्दीन शाह ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन और NEET विवाद के दौरान खुलकर छात्रों का समर्थन किया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई की तीखी आलोचना की।

इसी दौरान, 27 अक्टूबर 2026 को एक वीडियो संदेश में उन्होंने खुद को गर्व से दिमागी नक्सली (Urban Naxal) कहा। उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर शिक्षा प्रणाली को नष्ट करने और युवाओं के साहस को कुचलने का गंभीर आरोप लगाया।

नसीरुद्दीन शाह की यह बेबाकी उन्हें एक ऐसे मुकाम पर खड़ा करती है, जहाँ उनके प्रशंसक उनकी स्पष्टवादिता की सराहना करते हैं, तो वहीं उनके आलोचक इसे विवाद खड़ा करने का जरिया मानते हैं।

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