संयुक्त राष्ट्र महासभा ने लगातार 34वें वर्ष क्यूबा पर लगे अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों की निंदा करने के लिए मतदान किया है। हालांकि प्रस्ताव पारित हो गया, लेकिन इस बार इसके समर्थन में भारी गिरावट देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह बदलाव अमेरिका की कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
28 अक्टूबर को हुए मतदान में 130 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया, जबकि 17 देशों ने इसके विरोध में मतदान किया और 25 देश अनुपस्थित रहे। पिछले वर्ष की तुलना में यह आंकड़ा काफी अलग है। पिछले साल प्रस्ताव के समर्थन में 165 देश थे। जर्मनी, इटली और लातविया जैसे कई पश्चिमी देशों का इस बार मतदान से दूरी बनाए रखना, बदले हुए वैश्विक समीकरणों को दर्शाता है।
हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव प्रतीकात्मक महत्व रखता है, लेकिन यह कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। वाशिंगटन पर इन प्रतिबंधों को हटाने का कोई कानूनी दबाव नहीं है। छह दशक से अधिक समय से लागू इन प्रतिबंधों को बदलने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज़ ने मतदान के परिणामों का स्वागत करते हुए इसे अमेरिका के सफल राजनयिक प्रयासों का परिणाम बताया है।
मतदान के दौरान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में तनाव का माहौल देखा गया। क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिगेज़ ने अमेरिकी नीति को आर्थिक युद्ध करार दिया, जबकि अमेरिकी राजदूत वाल्ट्ज़ ने क्यूबा पर पलटवार किया। बहस इतनी तीखी हो गई कि संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों को बीच-बचाव करना पड़ा। विवाद के बाद, अमेरिका ने क्यूबा के एक राजनयिक को निष्कासित करने की घोषणा की है, जिसके बाद क्यूबा ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पास आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है।
यह राजनयिक खींचतान ऐसे समय में हो रही है जब क्यूबा अपने इतिहास के सबसे खराब आर्थिक और ऊर्जा संकट से गुजर रहा है। द्वीप पर ईंधन, भोजन और पानी की भारी किल्लत है। बिजली कटौती के चलते संचार और पानी की आपूर्ति जैसी बुनियादी सेवाएं ठप हो गई हैं।
अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि प्रतिबंधों का उद्देश्य क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार पर नीतियों में बदलाव के लिए दबाव बनाना है। हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा को तेल आपूर्ति करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी है, जिससे ईंधन का आयात और कम हो गया है। दूसरी ओर, क्यूबा की सरकार ने साफ कहा है कि देश की बिगड़ती स्थिति के लिए अमेरिका की नाकाबंदी ही एकमात्र जिम्मेदार है।
#BREAKING
— UN News (@UN_News_Centre) October 28, 2026
UN General Assembly ADOPTS resolution on the necessity of ending the economic, commercial and financial embargo imposed by the United States of America against Cuba
Result of the vote:
In favor: 130
Against: 17
Abstain: 25 pic.twitter.com/p4E3XqUpu6
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