नागपुर में भाजपा को बड़ा झटका: फड़नवीस के गढ़ में फिर लहराया कांग्रेस का परचम, अभिजीत वंजारी की धमाकेदार जीत
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महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक संदेश लेकर आए हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस के गृह क्षेत्र और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय नागपुर की ग्रेजुएट सीट पर कांग्रेस ने एक बार फिर कब्जा जमा लिया है। कांग्रेस प्रत्याशी अभिजीत गोविंदराव वंजारी की जीत ने भाजपा के गढ़ में सेंध लगा दी है।

रोचक रहा मुकाबले का अंत नागपुर ग्रेजुएट सीट का चुनाव किसी थ्रिलर फिल्म जैसा रहा। पहले राउंड की गिनती में कांग्रेस आगे रही, लेकिन दूसरे राउंड में भाजपा के सुधाकर कोहाले ने बढ़त बना ली। मुकाबला इतना कड़ा था कि मामला तीसरी पसंद के वोटों (Third-preference votes) तक जा पहुंचा। अंततः, निर्दलीय उम्मीदवार नीलेश करांडे के मतों के स्थानांतरण ने पासा पलट दिया और वंजारी 2,500 वोटों से विजयी घोषित हुए।

फड़नवीस का डिलीट हुआ ट्वीट नतीजों से पहले का माहौल भाजपा के लिए उत्साहजनक लग रहा था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस को जीरो बताते हुए तंज कसा था। हालांकि, जैसे ही वंजारी की जीत पक्की हुई, फड़नवीस को अपना वह ट्वीट डिलीट करना पड़ा। यह घटना भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से काफी शर्मनाक मानी जा रही है।

महायुति बनाम महा विकास अघाड़ी: क्या रहा गणित? महाराष्ट्र की पांच सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा-नीत महायुति को झटका लगा है। उसे पांच में से केवल दो सीटें मिलीं, जबकि विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) ने तीन सीटें अपने नाम कीं। पुणे और छत्रपति संभाजीनगर जैसी सीटों पर भी भाजपा और उसके सहयोगियों को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

कौन हैं अभिजीत वंजारी? अभिजीत गोविंदराव वंजारी कांग्रेस के एक कद्दावर नेता और शिक्षाविद हैं। स्वर्गीय विधायक गोविंदराव वंजारी के बेटे अभिजीत ने छात्र राजनीति (NSUI) से अपने करियर की शुरुआत की थी। वे अमर सेवा मंडल संस्था के माध्यम से विदर्भ में शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। 2020 में पहली बार इस सीट को जीतकर उन्होंने अपनी राजनीतिक क्षमता साबित की थी, और अब लगातार दूसरी जीत ने उन्हें नागपुर में कांग्रेस का एक बड़ा चेहरा बना दिया है।

जीत के बाद क्या बोले वंजारी? अपनी जीत पर अभिजीत वंजारी ने कहा कि भाजपा ने खुद को जिताने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। उनके सभी बड़े नेता नागपुर में डेरा डाले हुए थे, बावजूद इसके मतदाताओं ने उन पर भरोसा जताया। वंजारी ने इस जीत का श्रेय उन 48 संगठनों और कार्यकर्ताओं को दिया, जिन्होंने चुनाव के दौरान उनका समर्थन किया था।

यह जीत न केवल कांग्रेस के लिए मनोबल बढ़ाने वाली है, बल्कि आगामी चुनावों के लिए एक संकेत भी है कि भाजपा के अभेद्य माने जाने वाले किलों में भी दरारें पड़ रही हैं।

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