हरदीप पुरी की उम्मीदवारी पर बवाल: कांग्रेस का सवाल, भाजपा की कौन सी नस उनके हाथ में है?
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मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इस चयन को लेकर भाजपा पर तीखे हमले किए हैं और पुरी के नाम के साथ जुड़े विवादों को लेकर घेराबंदी शुरू कर दी है।

एपस्टीन फाइल्स का विवाद और कांग्रेस का हमला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पुरी की उम्मीदवारी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि केंद्रीय मंत्री का नाम अंतरराष्ट्रीय बाल यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़ा है। सिंघार ने पूछा है कि आखिर ऐसी कौन सी विवशता या नस है, जिसे दबाकर पुरी ने भाजपा को ब्लैकमेल कर रखा है।

सांस्कृतिक और नैतिक सवालों से घेरा कांग्रेस का कहना है कि भाजपा खुद को नैतिकता और महिला सुरक्षा की पक्षधर बताती है, फिर ऐसे विवादित व्यक्ति को उच्च सदन में भेजना कहाँ का न्याय है? उमंग सिंघार ने चुनौती दी कि क्या भाजपा के पास मध्य प्रदेश में दलित, आदिवासी या ओबीसी वर्ग से एक भी योग्य नेता नहीं था, जो उन्हें बाहर से किसी को उम्मीदवार बनाना पड़ा?

प्रयोगशाला बनी मध्य प्रदेश की राजनीति कांग्रेस नेताओं ने इसे मध्य प्रदेश के साथ भेदभाव करार दिया है। जीतू पटवारी और जयवर्धन सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि भाजपा मध्य प्रदेश को अपनी राजनीतिक प्रयोगशाला समझती है। जयवर्धन सिंह ने तो तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि भाजपा जुर्म में साझेदार वाली नीति अपना रही है, जहाँ जेफरी एपस्टीन जैसे व्यक्ति के मित्र को राज्यसभा भेजा जा रहा है।

क्या है एपस्टीन का मामला? कांग्रेस का दावा है कि अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी की गई एपस्टीन फाइल्स में हरदीप सिंह पुरी का नाम शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच पुरी और एपस्टीन के बीच दर्जनों ईमेल और मुलाकातें हुई थीं। हालांकि, हरदीप पुरी पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं और सफाई दे चुके हैं कि उनकी बातचीत का एपस्टीन के अपराधों से कोई संबंध नहीं है।

12 नवंबर को होना है उपचुनाव भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने पुरी को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार घोषित किया है, जबकि उनका पिछला कार्यकाल उत्तर प्रदेश से था। एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है। अब देखना यह है कि कांग्रेस का यह विरोध आगामी उपचुनाव में कितना प्रभाव डालता है और भाजपा इस पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया देती है।

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