संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों की मांग को लेकर भारत ने अब आर-पार की लड़ाई का संकेत दिया है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा परिषद में किसी भी तरह का भेदभाव अब स्वीकार्य नहीं होगा। भारत ने मांग की है कि सुरक्षा परिषद में जो भी नए स्थायी सदस्य शामिल हों, उन्हें भी वीटो पावर का समान अधिकार मिलना चाहिए।
वीटो का दुरुपयोग और हकीकत संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश परवथानेनी ने परिषद के इतिहास का काला सच सामने रखा है। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 331 बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया गया है। चौकाने वाली बात यह है कि पिछले साढ़े तीन दशकों में P5 (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) के सभी देशों ने इसका इस्तेमाल नहीं किया है। ज्यादातर वीटो का इस्तेमाल या इसकी धमकी मात्र 3 देशों द्वारा अपने राजनीतिक हितों को साधने के लिए दी जाती रही है।
दूसरे दर्जे की सदस्यता का विरोध भारत ने उन प्रस्तावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें नए स्थायी सदस्यों को वीटो पावर से वंचित रखने की बात कही जा रही थी। राजदूत हरीश परवथानेनी ने दो टूक कहा कि बिना वीटो के नए सदस्य केवल सेकेंड क्लास बनकर रह जाएंगे। भारत का तर्क है कि जब तक वीटो पावर मौजूद है, तब तक यह अधिकार सभी स्थायी सदस्यों के पास समान रूप से होना चाहिए। असमानता को बढ़ावा देने वाली कोई भी व्यवस्था परिषद की कार्यक्षमता को कमजोर करेगी।
वीटो जिम्मेदारी है, राजनीतिक हथियार नहीं राजदूत ने X पर साझा किए गए अपने बयान में साफ किया कि वीटो कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक भारी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि इसे संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना गलत है। भारत ने मांग की है कि 2022 में वीटो के उपयोग पर जवाबदेही तय करने के नियम के बावजूद इसमें कोई सुधार नहीं आया है, इसलिए अब ठोस बदलाव की जरूरत है।
समय के साथ बदलने की जरूरत भारत ने जोर देकर कहा है कि संयुक्त राष्ट्र को 1945 की पुरानी विचारधारा से बाहर निकलकर 21वीं सदी की वास्तविकताओं को अपनाना होगा। भारत ने टेक्स्ट-आधारित वार्ता शुरू करने और एक निश्चित समय-सीमा के भीतर सुधार प्रक्रिया को पूरा करने का आह्वान किया है। भारत का स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा परिषद का स्वरूप लोकतांत्रिक और समावेशी होना चाहिए, न कि चुनिंदा देशों की जागीर।
Delivered India s statement at the UNGA Plenary on the use of the Veto
— Parvathaneni Harish (@AmbHarishP) October 26, 2026
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➡️ Veto is a responsibility, not a tool of narrow political expediency. We note that two of the P5 have not exercised veto for over three and a half decades. Most vetoes or threats of vetoes… pic.twitter.com/6BcTk0UECA
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