अरुणाचल मुद्दे पर सेना ने पकड़े फर्जी वीडियो, किरेन रिजिजू बोले- कांग्रेस देश से मांगे माफी
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नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में चीनी घुसपैठ को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दो वीडियो पर विवाद गरमा गया है। भारतीय सेना ने इन दावों को पूरी तरह से गलत और दुष्प्रचार करार दिया है। इस खुलासे के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला है।

क्या था वायरल वीडियो का सच?

सोशल मीडिया पर दो वीडियो वायरल थे। पहले वीडियो में चीनी गाड़ियों को भारतीय सीमा में घुसते हुए दिखाया गया था। सेना ने स्पष्ट किया कि यह वीडियो सिक्किम के नाथू ला पास का है, जो एक अधिकृत बॉर्डर ट्रेड पॉइंट है। वहां कमर्शियल गाड़ियों की आवाजाही सामान्य प्रक्रिया है, जिसे गलत तरीके से चीनी घुसपैठ के रूप में पेश किया गया।

दूसरे वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया को अरुणाचल प्रदेश में चीनी कब्जे और सेना को सप्लाई न मिलने की बात कहते सुना गया। सेना ने जांच में पाया कि यह वीडियो डीपफेक तकनीक से बनाया गया है। असली फुटेज 27 अक्टूबर 2023 का है, जो कुपवाड़ा में एलओसी (LOC) पर घुसपैठ से संबंधित एक प्रेस ब्रीफिंग का था।

किरेन रिजिजू का कांग्रेस पर तीखा हमला

सेना की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है। रिजिजू ने कहा, कांग्रेस ने सेना की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए फर्जी AI वीडियो का सहारा लिया है। यह न केवल धोखेबाजी है, बल्कि भारत के दुश्मनों के एजेंडे को हवा देने जैसा है। कांग्रेस को इस हरकत के लिए पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सी. आर. केसवन ने भी इसे कांग्रेस की सेना विरोधी मानसिकता करार दिया है। उन्होंने कहा कि सेना के पराक्रम पर सवाल उठाना कांग्रेस की पुरानी आदत बन गई है।

NSUI का पलटवार

विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए NSUI अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने बचाव का रास्ता अपनाया है। उन्होंने कहा कि भले ही वीडियो तकनीकी तौर पर छेड़छाड़ किए गए हों, लेकिन उनमें उठाए गए मुद्दे वास्तविक हैं। उन्होंने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार दिल्ली में विरोध को कुचलने में व्यस्त है, जबकि अरुणाचल सीमा पर चीन की बढ़ती गतिविधियों पर चुप्पी साधे हुए है।

फिलहाल, इस मामले ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक नया राजनीतिक रण छेड़ दिया है। सेना ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही ऐसी भ्रामक सूचनाओं पर भरोसा न करें।

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