जम्मू-कश्मीर में विलय दिवस (एक्सेशन डे) के मौके पर पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ा हमला बोला है। 26 अक्टूबर 1947 के ऐतिहासिक समझौते का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि घाटी की मौजूदा खामोशी शांति नहीं, बल्कि खौफ का परिणाम है।
महबूबा मुफ्ती ने याद दिलाया कि महाराजा हरि सिंह ने जिस इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर किए थे, वह भारत के प्रति विश्वास का प्रतीक था। उन्होंने कहा, कश्मीरी जनता ने जिन्ना के पाकिस्तान को नहीं, बल्कि गांधी और नेहरू के सेक्युलर भारत को चुना था। हमारा विलय कुछ शर्तों के साथ हुआ था, ताकि हमारी विशिष्ट पहचान, संस्कृति और स्वायत्तता सुरक्षित रहे।
मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि 1953 के बाद शेख अब्दुल्ला के बदलता रुख और जनमत संग्रह की मांग ने कश्मीरियों को भारत की नजरों में हमेशा के लिए संदिग्ध बना दिया। इसी अविश्वास ने आरएसएस को एक राष्ट्र, एक संविधान का एजेंडा आगे बढ़ाने का मौका दिया, जिसने अंततः कश्मीर को दुनिया का सबसे अधिक सैन्यीकृत क्षेत्र बना दिया।
पीडीपी प्रमुख ने अनुच्छेद 370 और 35A के खात्मे को ऐतिहासिक समझौतों की रद्दी में फेंकी गई फाइल बताया। उन्होंने कहा, ये धाराएं केवल कानून नहीं, बल्कि हमारी जमीन और रोजगार की सुरक्षा का कवच थीं। 2019 में इन्हें हटाकर केंद्र ने न केवल कश्मीरी पहचान को कुचला है, बल्कि भारत के संविधान के उन मूल्यों को भी तार-तार किया है जो सबको साथ लेकर चलने की गारंटी देते थे।
घाटी में सुरक्षा बलों की भारी तैनाती और प्रदर्शनों पर पाबंदी पर सवाल उठाते हुए महबूबा ने कहा कि सरकार जिसे सामान्य स्थिति या शांति बताकर अपनी जीत का ढिंढोरा पीट रही है, वह वास्तव में डर का माहौल है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, आज जो सख्ती कश्मीर में बरती जा रही है, वही अब पूरे देश में दिखाई दे रही है। यह पूरे भारत के लिए एक चेतावनी है।
महबूबा मुफ्ती ने केंद्र सरकार से सीधा सवाल किया कि युवाओं को जेलों में ठूसकर और बेल मिलने के बाद भी उन पर कानूनी अड़चनें डालकर कब तक शासन किया जाएगा? उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर का रिश्ता केवल ताकत या बंदूक के दम पर नहीं चल सकता।
अपने संबोधन के अंत में, मुफ्ती ने स्पष्ट किया कि उन्हें वर्तमान सत्ता प्रतिष्ठान से कोई अपेक्षा नहीं है, लेकिन वे देश की आम जनता से अपील करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लोग उन वादों को याद रखें जो आजादी के समय कश्मीरियों से किए गए थे, क्योंकि यही रिश्ता इंसानियत और आपसी सम्मान की नींव पर टिका था।
*Srinagar, Jammu and Kashmir: PDP chief Mehbooba Mufti says, Jammu and Kashmir acceded to India, but because we were a Muslim-majority state, we had a distinct identity compared to other princely states. People belonging to Hindu, Muslim, Sikh, Christian and Buddhist communities… pic.twitter.com/949PqgYMtx
— IANS (@ians_india) October 26, 2026
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