ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में एक ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिला है। वामपंथी नेता लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने कड़े मुकाबले में दक्षिणपंथी पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो को मात देकर चौथी बार सत्ता हासिल कर ली है। 80 वर्षीय लूला का नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा।
क्या रहा नतीजों का गणित? मतगणना के बाद जारी आंकड़ों के अनुसार, लूला को कुल 51.75 प्रतिशत वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो 48.25 प्रतिशत मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। ब्राजील के चुनावी न्यायालय ने 100 प्रतिशत वोटों की गिनती के बाद लूला की जीत की आधिकारिक पुष्टि की।
पहले राउंड में पिछड़ने के बाद पलटी बाजी यह चुनाव ब्राजील के इतिहास में अनोखा रहा। 1989 से शुरू हुई प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली में यह पहली बार हुआ है जब पहले राउंड में पीछे रहने वाला उम्मीदवार दूसरे राउंड में जीत दर्ज कर राष्ट्रपति बना। 4 अक्टूबर को हुए पहले चरण में लूला अपने प्रतिद्वंद्वी से करीब 22 लाख वोटों से पीछे थे।
सोशल मीडिया ने बदली चाल पहले दौर की हार के बाद लूला ने अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी। उन्होंने नेवर अगेन बोल्सोनारो का नारा देते हुए युवाओं को साधने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। स्मार्टफोन के जरिए समर्थकों के साथ सेल्फी और वीडियो बनाकर उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी पैठ बनाई, जिसका सीधा फायदा उन्हें अंतिम नतीजों में मिला।
ब्राजील किसी की जागीर नहीं जीत के बाद लूला ने अमेरिका पर कटाक्ष करते हुए कहा कि ब्राजील किसी भी देश का पिछलग्गू नहीं बनेगा। उन्होंने कहा, हम विदेशी हस्तक्षेप को नाकाम कर चुके हैं। ब्राजील किसी की जागीर नहीं है और हम अपनी स्वतंत्र नीतियां खुद तय करेंगे। लूला की जीत को लैटिन अमेरिका में वामपंथी विचारधारा के पुनरुत्थान के रूप में देखा जा रहा है।
विवादों के बीच चुनाव का समापन चुनाव प्रक्रिया के दौरान विवाद भी देखने को मिले। मतदान के अंतिम समय में सुप्रीम कोर्ट के जज ने वोटिंग का समय दो घंटे बढ़ाने का आदेश दिया, जिसे लेकर बोल्सोनारो ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने चुनाव परिणामों को चुनौती देने और नतीजों को रद्द कराने की मांग करने की बात कही है।
लैटिन अमेरिका की राजनीति पर असर ब्राजील लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (2.6 ट्रिलियन डॉलर GDP) है। ऐसे में लूला की जीत का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा। मैक्सिको के बाद ब्राजील में वामपंथी सरकार का होना यह संकेत देता है कि लैटिन अमेरिका आने वाले समय में अमेरिकी दबाव के बावजूद स्वतंत्र आर्थिक और राजनीतिक राह अपनाने के लिए तैयार है।
After winning Brazil s Presidential Election, Luiz Inácio Lula da Silva says, We managed to convince people that voting was extremely important to safeguard democracy in Brazil. We defeated foreign intervention through digital platforms. Brazil is no one s backyard. We will… pic.twitter.com/OFxe12xjSQ
— ANI (@ANI) October 26, 2026
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