पुलिस पर आतिशबाजी, सड़कों पर आग: क्यों सुलग रहा है अल्बानिया?
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तिराना: अल्बानिया की राजधानी तिराना की सड़कें इन दिनों किसी युद्ध के मैदान में तब्दील हो गई हैं। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने दंगा-रोधी पुलिस पर जमकर आतिशबाजी के रॉकेट दागे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में यह दृश्य किसी हॉलीवुड फिल्म के एक्शन सीन जैसा लग रहा है, लेकिन हकीकत में यह गंभीर गृह-अशांति का संकेत है।

आतिशबाजी और पत्थरबाजी का तांडव शनिवार को हुए विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बलों को निशाना बनाते हुए उन पर पटाखों और आतिशबाजी की बौछार कर दी। सड़कों पर रॉकेट फटने से चारों तरफ आग के गोले दिखाई दे रहे थे। भीड़ ने न केवल पुलिस पर पत्थर बरसाए, बल्कि कृषि मंत्रालय के प्रवेश द्वार पर भी आग लगा दी। जवाब में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले, पानी की बौछारें और रबर की गोलियों का सहारा लिया।

क्यों गुस्से में है जनता? अल्बानिया में यह विरोध प्रदर्शन अचानक नहीं भड़का है। देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, बढ़ती बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को लेकर जनता लंबे समय से नाराज है। छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन अब व्यापक रूप ले चुका है। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा के तुरंत इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस दौरान बैंकों, सरकारी इमारतों और दुकानों को भी निशाना बनाया गया है।

क्या है आंदोलन की जड़ें? इस अशांति की शुरुआत गर्मियों में तब हुई थी, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के एक लग्जरी प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन हुए थे। हालांकि, तब वे विरोध शांतिपूर्ण थे। अब यह गुस्सा शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार, अधिक ट्यूशन फीस और गिरते जीवन स्तर जैसे मुद्दों के साथ और गहरा गया है।

यूरोप में फैली असंतोष की लहर अल्बानिया के ये विरोध प्रदर्शन अकेले नहीं हैं। असल में यह फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल जैसे यूरोपीय देशों में चल रहे व्यापक जन-आंदोलनों का ही एक हिस्सा है। इन सभी देशों में लोग जीवन-यापन की बढ़ती लागत, पेंशन संकट, आवास की समस्या और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। अल्बानिया का ताजा घटनाक्रम इस बात का प्रमाण है कि सत्ता विरोधी लहर पूरे यूरोप में एक नई चुनौती बनकर उभर रही है।

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