कृषि संवाद: छत्तीसगढ़ के किसानों को मालामाल बनाएगी समन्वित खेती , मंत्री रामविचार नेताम ने साझा की कार्ययोजना
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रायपुर। छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के किसानों की आय बढ़ाने का एकमात्र रास्ता इंटीग्रेटेड फार्मिंग (समन्वित खेती) है। उन्होंने किसानों से परंपरागत ढर्रे को छोड़कर कृषि के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और उद्यानिकी को जोड़ने की अपील की है।

सहकारिता ही छोटे किसानों की ताकत

मंत्री नेताम ने कहा कि राज्य के छोटे और सीमांत किसानों को अपनी उपज की बेहतर कीमत और गुणवत्ता के लिए सहकारिता का सहारा लेना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसान खुद को एफपीओ (FPO) और स्वसहायता समूहों से जोड़ें। जब किसान समूह में काम करेंगे, तभी उन्हें बाजार में मोलभाव करने की ताकत मिलेगी और शोषण से मुक्ति मिलेगी।

सिर्फ धान पर निर्भरता से होगा नुकसान

प्रदेश में रबी सीजन के दौरान बड़ी मात्रा में जमीन खाली रहने पर मंत्री ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अक्सर किसान साल भर धान की फसल लेते हैं, जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति कम हो रही है। मंत्री ने सलाह दी कि धान के बाद खाली रहने वाली 70 फीसदी जमीन पर दलहन-तिलहन और मक्का की खेती की जाए। मक्का न केवल धान से अधिक उत्पादन देता है, बल्कि इसके अवशेष भी किसानों के लिए उपयोगी हैं।

अमानक खाद-बीज बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई

कृषि विभाग की जवाबदेही पर बात करते हुए नेताम ने कहा कि सरकार की नीति और नीयत पूरी तरह साफ है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि अमानक बीज और खाद बेचने वाले किसी भी माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। अब तक ऐसे दोषियों पर पहली बार इतनी सख्त एफआईआर और कार्रवाई की गई है। सरकार का उद्देश्य किसानों को हर हाल में सुरक्षा और न्याय प्रदान करना है।

पशुपालन: आय का जरिया और सामाजिक जिम्मेदारी

पशुपालन को लेकर मंत्री ने एक भावुक और व्यावहारिक अपील की। उन्होंने कहा कि गाय को सिर्फ दूध का जरिया न मानकर लक्ष्मी के रूप में देखा जाना चाहिए। दूध देने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ने की प्रवृत्ति पर उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राज्य में मिल्क चेन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। पशुपालन को खेती का अभिन्न हिस्सा बनाने से न केवल दूध उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि आवारा पशुओं की समस्या का भी समाधान होगा।

किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल

धान का 3100 रुपये समर्थन मूल्य देने और खाद-बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद अब विभाग का लक्ष्य किसानों को नवाचार की ओर ले जाना है। मंत्री ने कहा कि जो किसान ड्रैगन फ्रूट, शिमला मिर्च और जैविक खेती जैसे विकल्पों को अपना रहे हैं, वे आर्थिक रूप से काफी समृद्ध हुए हैं। सरकार अब इन्हीं सफल मॉडलों को लघु किसानों के बीच ले जाने की योजना पर काम कर रही है।

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