ईरान पर मंडराता युद्ध का खतरा: ट्रंप की खुली चेतावनी और पेंटागन के दो घातक प्लान
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मिडिल ईस्ट में एक बार फिर बड़े युद्ध के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की संभावना को सिरे से खारिज नहीं किया है। व्हाइट हाउस से आ रहे ये संकेत दुनिया भर में चिंता का विषय बने हुए हैं।

ट्रंप की चेतावनी: कल या समझौता? पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका कल ही ईरान पर हमला कर सकता है या फिर किसी ठोस समझौते पर हस्ताक्षर कर सकता है। ट्रंप का मुख्य लक्ष्य तेहरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। उनका मानना है कि अगर सैन्य दबाव कम किया गया, तो ईरान फिर से अपनी परमाणु क्षमता बहाल कर लेगा।

पेंटागन के दो नए स्ट्राइक ऑप्शन यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान को सबक सिखाने के लिए दो विस्तृत सैन्य योजनाएं तैयार की हैं। इस बार हमलों का दायरा सिर्फ ईरानी तटों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अंदरूनी हिस्सों में स्थित सैन्य और राजनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, यदि इजरायल इस सैन्य अभियान में साथ देता है, तो हमले ईरान के ऊर्जा ढांचे, पुलिस मुख्यालयों और महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थानों तक फैल सकते हैं। इन विकल्पों को 3 नवंबर के मिडटर्म चुनावों के बाद अमल में लाने की तैयारी है।

क्या युद्ध समाधान है? रक्षा विशेषज्ञों और यूरेशिया ग्रुप का मानना है कि बार-बार के हमलों से ईरान का रुख बदलने वाला नहीं है। पिछले सैन्य अभियानों ने ईरान की मिसाइल क्षमता को आंशिक नुकसान जरूर पहुंचाया है, लेकिन उसके सैन्य और राजनीतिक ढांचे की रीढ़ अभी भी मजबूत है।

इसके अलावा, ऐसे किसी भी संघर्ष का सीधा असर वैश्विक ईंधन कीमतों और मिडिल ईस्ट की सप्लाई चेन पर पड़ना तय है। विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या केवल सैन्य ताकत के दम पर तेहरान को झुकाया जा सकता है, या यह क्षेत्र को एक और लंबी अस्थिरता में धकेल देगा।

अमेरिकी-इजरायली गठबंधन की तैयारी ABC News की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने संभावित नए सैन्य अभियानों पर गहन चर्चा की है। हालांकि, अंतिम निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में है। ईरान के लिए यह लड़ाई अब केवल परमाणु कार्यक्रम की नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व की बन चुकी है, जिससे तनाव और अधिक बढ़ने की आशंका है।

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