इंटरनेट की लाइफलाइन पर मंडराया खतरा: ट्रंप की धमकी के बाद ईरान ने दी केबल काटने की चेतावनी
News Image

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब सिर्फ सैन्य अड्डों तक सीमित नहीं रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बाद ईरान ने एक ऐसी धमकी दी है, जिसने पूरी दुनिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था में हलचल मचा दी है। ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बनाएगा।

ट्रंप की एपिक फ्यूरी और ईरान का आक्रामक जवाब

फ्लोरिडा की एक रैली में ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक और एपिक फ्यूरी जैसे सैन्य अभियान का संकेत दिया है। ट्रंप का कहना है कि ईरान के पास अब स्मार्ट बनने का ही विकल्प है। हालांकि, तेहरान ने इसे खुली चुनौती के रूप में लिया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस बार कोई रेड लाइन नहीं होगी और वे न केवल समुद्र के नीचे की केबलों को काट देंगे, बल्कि अमेरिकी टेक दिग्गजों (गूगल, अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट) के डेटा सेंटर्स को भी निशाना बना सकते हैं।

डिजिटल दुनिया ठप होने का डर

विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया का 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक समुद्र के नीचे बिछी केबलों के माध्यम से चलता है। हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाला ट्रैफिक वैश्विक स्तर पर सीमित है, लेकिन कई केबल एक साथ कटने से ई-कॉमर्स, ग्लोबल फाइनेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग और बैंकिंग सेवाएं अचानक ठप हो सकती हैं। युद्ध के माहौल में इन केबलों की मरम्मत करना न केवल मुश्किल है, बल्कि इसमें महीनों का समय लग सकता है।

खाड़ी देशों के टेक्नोलॉजी हब बनने के सपने पर संकट

खाड़ी देश फिलहाल अपनी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और टेक्नोलॉजी हब बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। ईरान की यह धमकी इन अरबों डॉलर के निवेश के लिए एक बड़ा खतरा है। यदि इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर बाधित होता है, तो खाड़ी देशों की डिजिटल अर्थव्यवस्था की कमर टूट सकती है।

वैश्विक कूटनीति: युद्ध टालने की कोशिशें

इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और तुर्की ने कड़ी चेतावनी जारी की है। इन देशों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई से संघर्ष पूरे मध्य पूर्व में फैल जाएगा, जिसका असर तेल की कीमतों से लेकर वैश्विक संचार तक पड़ेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की धमकी देकर ईरान दरअसल अमेरिका के कॉरपोरेट जगत और खाड़ी देशों पर दबाव डाल रहा है ताकि वे ट्रंप प्रशासन को नए युद्ध से रोक सकें। क्या कूटनीति इस डिजिटल महायुद्ध को टाल पाएगी, यह आने वाले कुछ दिन तय करेंगे।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

बिग बॉस 20: स्काउट और लव गिल की क्लोजनेस पर भड़के रोहित शेट्टी, गर्लफ्रेंड काशवी की एंट्री से घर में मचेगा बवाल?

Story 1

दलेर मेहंदी का अपमान: मीका सिंह ने CM धामी से की मंत्री सुबोध उनियाल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग

Story 1

इंदौर बना सेमीकंडक्टर का नया केंद्र: सीएम मोहन यादव आज करेंगे मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 का आगाज

Story 1

दीपावली और छठ पर मुजफ्फरपुर पुलिस की फ्री बस सेवा : परदेसियों की अब नहीं लुटेगी गाढ़ी कमाई

Story 1

दोस्त बनाने नहीं आए, वर्ल्ड चैंपियन हैं : अभिषेक शर्मा की दहाड़ से गूंजा ड्रेसिंग रूम, वीडियो वायरल

Story 1

व्यापारियों की पीड़ा समझें : दिल्ली के कारोबारियों की राहुल गांधी से गुहार, रैली टालने की अपील

Story 1

पंजाब विधानसभा में घमासान: सुखपाल खैरा पूरे सत्र के लिए निलंबित, CM की गैरमौजूदगी पर विपक्ष का हमला

Story 1

MCD के 4,000 कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले: समान काम, समान वेतन का बड़ा तोहफा!

Story 1

अंजलि अरोड़ा पर ₹1.20 करोड़ का कानूनी शिकंजा: इवेंट छोड़ना पड़ा भारी

Story 1

सोनिया गांधी का X पर धमाका: पहली बार साझा किया राजीव गांधी संग अपनी लव स्टोरी का अनसुना सच