चूरू की चुनावी जंग: पूर्व मंत्री के बेटे और बहू एक साथ मैदान में, साख बचाने की चुनौती
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राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में चूरू से एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़ और उनकी पत्नी कनिका सिंह राठौड़ को चुनावी मैदान में उतारा है।

दोनों ने इस बार एक साथ अपनी सियासी पारी की शुरुआत की है।

अलग-अलग जोन, एक ही लक्ष्य

कनिका सिंह राठौड़ ने जोन 23 से और उनके पति पराक्रम सिंह राठौड़ ने वार्ड 39 (जोन 39) से बीजेपी के टिकट पर नामांकन दाखिल किया है। नामांकन के बाद दोनों ने अपनी जीत का दावा करते हुए कार्यकर्ताओं में जोश भरा है।

पराक्रम सिंह ने कहा, पार्टी ने हम पर भरोसा जताया है। हम जनता के बीच जाकर उनका आशीर्वाद मांग रहे हैं। हमें पूरा विश्वास है कि हम निर्णायक बहुमत के साथ जीत हासिल करेंगे।

विकास की कड़ी जोड़ने का एजेंडा

चुनावी एजेंडे पर बात करते हुए पराक्रम सिंह ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य केंद्र और प्रदेश की तर्ज पर अब गांवों में भी बीजेपी की सरकार बनाना है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य स्पष्ट है—पंचायत समिति और जिला परिषद में बीजेपी का प्रधान और प्रमुख बनाना, ताकि विकास की गाड़ी बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ती रहे।

विरासत और राजनीति का संगम

अपने पिता राजेंद्र राठौड़ के चार दशकों लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए पराक्रम सिंह ने कहा, मेरे पिता ने चूरू की जनता को हमेशा परिवार माना है। उनकी 24 घंटे जनसेवा की प्रेरणा ने ही मुझे राजनीति में आने के लिए प्रेरित किया है। मैं जनसेवा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं।

महिला सशक्तिकरण पर जोर

वहीं, कनिका सिंह राठौड़ ने अपने चुनावी विजन को साफ करते हुए कहा कि उनका फोकस महिलाओं को आगे बढ़ाने और उनके सशक्तिकरण पर है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं जो छोटे स्तर पर अपना बिजनेस कर रही हैं, उन्हें प्रोत्साहित करना और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना उनकी प्राथमिकता रहेगी।

चार चरणों में होगा फैसला

राजस्थान में जिला परिषद और पंचायत समिति के चुनाव चार चरणों में संपन्न होंगे। पहले चरण के मतदान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जबकि अन्य चरण 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 14 नवंबर को होंगे। वहीं, पंच-सरपंच पदों के लिए मतदान 24 अक्टूबर से 16 नवंबर के बीच अलग-अलग चरणों में आयोजित किए जाएंगे।

अब देखना यह होगा कि राठौड़ परिवार की यह नई पीढ़ी जनता के विश्वास पर कितनी खरी उतरती है।

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