क्या चीन के साथ सैन्य समाधान की राह बंद हो गई है? पूर्व आर्मी चीफ नरवणे का बड़ा खुलासा
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भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने चीन के साथ जारी सीमा विवाद को लेकर एक बड़ी और स्पष्ट टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि गलवान झड़प के बाद यह पूरी तरह से साफ हो गया है कि चीन के साथ सीमा विवाद का कोई सैन्य समाधान संभव नहीं है।

सीमा बनाम इंटरनेशनल बॉर्डर का फर्क जनरल नरवणे ने जानबूझकर बाउंड्री (सीमा) शब्द का इस्तेमाल करते हुए कहा कि चीन के साथ अक्सर विवाद की जड़ स्पष्ट परिभाषा का न होना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा (International Border) स्पष्ट रूप से निर्धारित और मान्यता प्राप्त होती है, लेकिन चीन के साथ हमारी बाउंड्री की स्थिति वैसी नहीं है।

असहमति वाले इलाकों में झड़पें जारी रहने की आशंका पूर्व आर्मी चीफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन इलाकों में सीमा को लेकर असहमति है, वहां आगे भी छिटपुट झड़पें होती रहेंगी। उन्होंने गलवान की घटना को इसी असहमति का एक उदाहरण बताया। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि अब बल प्रयोग के जरिए सीमा बदलने का कोई विकल्प नहीं बचा है।

भारत का सख्त रुख और कूटनीतिक जीत नरवणे के अनुसार, भारत ने यह साफ कर दिया है कि सीमाओं को बदलने के लिए एकतरफा बल प्रयोग उसे किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। इस कड़े रुख ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख को सैन्य, राजनयिक और राजनीतिक तौर पर काफी मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि इसी दृढ़ता के कारण आज बातचीत और संवाद को नई गति मिली है।

क्या है वर्तमान स्थिति? जून 2020 की गलवान झड़प के बाद से भारत और चीन के संबंधों में भारी तनाव रहा है। लंबे समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद, अक्टूबर 2024 में डेपसांग और डेमचोक में गश्त को लेकर दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। हालांकि, इससे तनाव तो कम हुआ है, लेकिन बड़े सीमा विवाद का समाधान अभी भी बातचीत के जरिए ही खोजा जा रहा है।

बातचीत का रास्ता ही एकमात्र विकल्प वर्तमान में दोनों देश विशेष प्रतिनिधि तंत्र के जरिए सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं। जनरल नरवणे का मानना है कि सैन्य विकल्प के बंद होने के बाद, राजनयिक बातचीत और समन्वय ही एकमात्र रास्ता बचा है, जिसे अब दोनों पक्ष गंभीरता से ले रहे हैं।

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