गुरुग्राम से नूंह तक अंधेरा: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की 3 दिन की हड़ताल क्यों, क्या है इलेवन पावर का पूरा विवाद?
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हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के कारण गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और अंबाला समेत 15 जिलों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कहीं घंटों बिजली गुल है, तो कहीं पानी की किल्लत से लोग सड़कों पर उतर आए हैं। आइए समझते हैं कि इस आक्रोश के पीछे की असली वजह क्या है।

विवाद की जड़: इलेवन पावर को 25 साल का लाइसेंस

इस पूरे विवाद की शुरुआत हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (HERC) के 19 अक्टूबर के एक आदेश से हुई। आयोग ने निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए 25 साल का समानांतर लाइसेंस (Parallel License) दे दिया है। यह फैसला बिजली अधिनियम 2003 की धारा 14 के तहत लिया गया है।

क्या है समानांतर लाइसेंस का मतलब?

इसका सीधा अर्थ यह है कि अब उसी इलाके में सरकारी कंपनी (DHBVN) के साथ-साथ एक निजी कंपनी भी अपना नेटवर्क बिछा सकेगी और बिजली बेच सकेगी। उपभोक्ताओं के पास भविष्य में यह विकल्प होगा कि वे सरकारी या निजी, जिस कंपनी से चाहें बिजली ले सकें। कंपनी ने 5 साल में अपना नेटवर्क तैयार करने का दावा किया है, और 2027-28 तक वास्तविक आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है।

कर्मचारी क्यों हैं नाराज?

हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन और अन्य यूनियनों का मानना है कि यह निजीकरण की एक सोची-समझी शुरुआत है। कर्मचारियों का तर्क है कि:

हड़ताल का असर और सरकारी रुख

22 से 24 अक्टूबर तक घोषित इस हड़ताल के चलते विभाग को हजारों शिकायतें मिल रही हैं। वहीं, सरकार बैकफुट पर दिख रही है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा है कि सरकार इस आदेश के खिलाफ अपीलीय विद्युत न्यायाधिकरण (APTEL) में जाएगी और इस पर रोक की मांग करेगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और बातचीत से समाधान निकालने की अपील की है।

क्या समाधान निकलेगा?

प्रशासन ने हड़ताल खत्म करने के लिए कई दौर की बैठकें कीं, लेकिन फिलहाल कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। यूनियनों का कहना है कि 24 अक्टूबर को हड़ताल के अंतिम दिन वे अपने अगले आंदोलन की घोषणा करेंगे। हालांकि, कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि वे अस्पतालों जैसी आवश्यक सेवाओं की बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होने देंगे। जहां कुछ उपभोक्ता इस प्रतिस्पर्धा का स्वागत कर रहे हैं ताकि सेवा में सुधार हो, वहीं बड़ी संख्या में कर्मचारी इसे अपने भविष्य के खिलाफ मानकर डटे हुए हैं।

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