बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ (EU) की व्यापारिक नीतियों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ द्वारा स्टील और अन्य उत्पादों पर लगाया गया कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) न केवल विकासशील देशों के लिए बाधा है, बल्कि यह खुद यूरोप की अर्थव्यवस्था के लिए भी आत्मघाती साबित होगा।
आत्मघाती नीतियों से खुद को नुकसान पहुंचा रहा यूरोप पीयूष गोयल ने कहा कि यूरोपीय संघ अपने इस्पात उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाकर अपने लिए मुसीबत मोल ले रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि इन बेतुके नियमों के कारण यूरोप में स्टील, एल्युमीनियम और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री बेहद महंगी हो जाएगी। इसका सीधा असर वहां के बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स—जैसे हाईवे, पाइपलाइन और बिजली परियोजनाओं—की लागत पर पड़ेगा, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा।
75-77 नियमों का मायाजाल गोयल ने यूरोपीय संघ पर नियमों के अंबार लगाने का आरोप लगाया। मंत्री ने कहा, यूरोपीय संघ में 75 से 77 ऐसे नियम हैं जिनका कोई अंत नहीं है। आप लगातार नए प्रतिबंध जोड़कर अपने ही उद्योगों को प्रतिस्पर्धा के लिहाज से कमजोर बना रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि दुनिया अब पारस्परिकता (Reciprocity) के सिद्धांत पर चलती है। यदि यूरोप दूसरे देशों के व्यापार में बाधा डालेगा, तो अन्य देश भी जवाबी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
कार्बन उत्सर्जन की समस्या आपकी पैदा की हुई है जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर गोयल ने पश्चिमी देशों को उनके ऐतिहासिक रिकॉर्ड की याद दिलाई। उन्होंने कड़े लहजे में पूछा- आखिर ओजोन लेयर को नुकसान किसने पहुंचाया? हवा में इतना कार्बन किसने भरा?
भारत का बचाव करते हुए उन्होंने आंकड़े पेश किए:
विकासशील देशों पर दोहरी मार भारत की मुख्य आपत्ति यह है कि CBAM जैसे नियम साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों (Common but Differentiated Responsibilities) के सिद्धांत को नजरअंदाज करते हैं। गोयल ने कहा कि विकसित देशों ने अपने औद्योगिक विकास के दौरान सस्ते ईंधन का भरपूर इस्तेमाल किया, लेकिन अब वे विकासशील देशों पर पर्यावरण के नाम पर ऐसे नियम थोप रहे हैं जो उनके आर्थिक विकास की गति को धीमा कर देंगे।
निष्कर्ष: वादों को पूरा करने की जरूरत मंत्री ने अंत में याद दिलाया कि केवल नियम लागू करना काफी नहीं है। विकसित देशों को विकासशील देशों से किए गए जलवायु वित्त और तकनीक हस्तांतरण के वादों को पूरा करना चाहिए। पीयूष गोयल का यह बयान स्पष्ट करता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने हितों की रक्षा के लिए आंकड़ों के साथ तर्क रखने में पीछे नहीं रहेगा।
India is conscious of and committed to its role in climate action. pic.twitter.com/ONx3nB0ik8
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) October 22, 2026
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