बीकानेर हाउस में सेंसरशिप का विवाद: रेहान वाड्रा का प्रदर्शन, प्रियंका गांधी ने कहा- मुझे आप पर गर्व है
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नई दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक केंद्र बीकानेर हाउस में आयोजित एक कला प्रदर्शनी विवादों के घेरे में आ गई है। यहाँ हाल ही में देश के विभिन्न जन-आंदोलनों और प्रदर्शनों पर आधारित तस्वीरों को हटाने का आदेश दिया गया, जिसके बाद से कला जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल मची हुई है।

क्या है पूरा मामला? इस प्रदर्शनी में फोटोग्राफर रेहान वाड्रा की चुनिंदा तस्वीरें प्रदर्शित की गई थीं, जिनमें हालिया समय के सामाजिक आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के दृश्यों को दिखाया गया था। हालांकि, बाद में इन तस्वीरों को प्रदर्शित करने पर रोक लगा दी गई और उन्हें हटाने का निर्देश दिया गया। कला प्रेमियों और जानकारों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला और सेंसरशिप करार दिया है।

रेहान वाड्रा का तीखा प्रहार रेहान वाड्रा ने इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कला समाज का आईना होती है और विरोध या असंतोष के दृश्यों को कला के माध्यम से प्रदर्शित करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है। रेहान ने कला को दबाने के इस कदम को रचनात्मकता के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इस तरह से कला का गला घोंटना पूरी तरह गलत है।

प्रियंका गांधी का पुरजोर समर्थन इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अपने बेटे के समर्थन में खुलकर सामने आई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, जब सत्ता में बैठा व्यक्ति दूसरे की अभिव्यक्ति से डरने लगता है, तो वह अनजाने में अपनी ही सत्ता खो देता है जिसे वह बचाने की कोशिश कर रहा होता है। उन्होंने रेहान का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे सत्य के साथ खड़े रहें, उन्हें अपने बेटे पर गर्व है।

राजनीतिक घेराबंदी: अशोक गहलोत का हमला राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना को भाजपा सरकार पर सीधे हमले के रूप में लिया है। उन्होंने कहा कि बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार की संपत्ति है और भाजपा सरकार की निगरानी में एक युवा कलाकार की कला का दमन करना निंदनीय है। गहलोत ने यह भी दावा किया कि प्रदर्शनी में तिरंगे की तस्वीरों को हटाने का भी दबाव बनाया गया था, जिसे रेहान ने सिरे से खारिज कर दिया।

सेंसरशिप पर छिड़ी बहस यह घटना अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुकी है। आलोचकों का तर्क है कि यदि सांस्कृतिक केंद्रों में भी सच्चाई बयां करने वाली तस्वीरों को प्रतिबंधित किया जाएगा, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है। भाजपा पर निशाना साधते हुए विपक्ष ने सवाल किया है कि आखिर एक फोटो प्रदर्शनी से सरकार इतनी डरी हुई क्यों है कि उसे सच्चाई को सेंसर करना पड़ रहा है।

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