जामिया में छात्र आंदोलन पर गरमाई सियासत: सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने प्रशासन को घेरा
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) में छात्र संघ की बहाली को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक रूप ले चुका है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने विश्वविद्यालय पहुंचकर छात्रों का समर्थन किया और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए।

प्रशासन का बर्ताव क्रूर और तानाशाही भरा

सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बेहद क्रूरतापूर्ण व्यवहार कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा गार्ड की वर्दी में कुछ लोग छात्रों को डरा-धमका रहे हैं।

प्रतापगढ़ी के अनुसार, 10 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में से दो की तबीयत काफी बिगड़ चुकी है, लेकिन प्रशासन उन्हें रोकने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें भी छात्रों तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वे किसी तरह वहां पहुंचे।

समिति का गठन महज एक छलावा

छात्र संघ की मांग पर विचार करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बनाई गई सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति को इमरान प्रतापगढ़ी ने टालमटोल की चाल बताया।

उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वहां छात्र संघ बहाल हो सकता है, तो जामिया में क्यों नहीं? उन्होंने सवाल किया कि प्रशासन छात्र राजनीति को लाठी के दम पर क्यों कुचलना चाहता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अपनी तानाशाही रवैया नहीं छोड़ता, तो NSUI छात्रों के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखेगी।

क्या है छात्र संघ बहाली का पूरा विवाद?

जामिया में छात्र संघ (JMI-SU) को साल 2006 में भंग कर दिया गया था। उस समय परिसर में लगातार हो रहे हिंसक टकराव और तत्कालीन कुलपति पर हमलों के कारण प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया था। तब से छात्र लगातार संघ की बहाली और लोकतांत्रिक चुनाव की मांग कर रहे हैं।

वर्तमान में 12 अक्टूबर 2026 से छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। छात्रों का कहना है कि वे पिछले 20 वर्षों से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

प्रशासन की अगली रणनीति

लगातार बढ़ते दबाव के बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाल ही में छात्र संघ के नए संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है। प्रशासन का कहना है कि यह समिति न केवल छात्रों की मांगों की समीक्षा करेगी, बल्कि कैंपस में शांति और शैक्षणिक माहौल बहाल करने के लिए भी काम करेगी।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह समिति छात्रों के आक्रोश को शांत कर पाएगी या यह आंदोलन आने वाले दिनों में और अधिक उग्र रूप ले लेगा।

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