टीवी चैनलों पर नकेल: आतंकी ऑपरेशन की लाइव कवरेज से लेकर AI तक, सरकार ने जारी की सख्त गाइडलाइंस
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टीवी न्यूज चैनलों की मनमानी पर अब केंद्र सरकार सख्त हो गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है। इसमें साफ कहा गया है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी प्रसारित नहीं किया जा सकता और प्रोग्राम कोड का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है।

नियम तोड़े तो होगी कार्रवाई मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि चैनलों ने नियमों का उल्लंघन किया, तो उनके खिलाफ केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह एडवाइजरी केवल कागजी औपचारिकता नहीं, बल्कि संपादकीय जिम्मेदारी तय करने के लिए है।

आतंकी ऑपरेशन की लाइव कवरेज पर पूर्ण प्रतिबंध सुरक्षा बलों के किसी भी एंटी-टेरर ऑपरेशन की लाइव कवरेज करना अब पूरी तरह प्रतिबंधित है। सरकार का तर्क है कि इससे सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक हो सकती है। चैनलों को निर्देश दिया गया है कि वे ऑपरेशन खत्म होने तक केवल आधिकारिक ब्रीफिंग का ही इंतजार करें। साथ ही, पुरानी फुटेज को LIVE बताकर चलाने पर भी रोक लगा दी गई है।

हिंसा और अपराध की रिपोर्टिंग पर लगाम मंत्रालय ने सनसनीखेज रिपोर्टिंग पर गहरी नाराजगी जताई है। अब चैनलों को हिंसक और परेशान करने वाली तस्वीरें दिखाने में अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी। अपराध को आकर्षक या सामान्य दिखाने वाली रिपोर्टिंग पर रोक होगी। साथ ही, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में पीड़िता की पहचान (नाम, चेहरा या परिवार की जानकारी) उजागर करना कानूनी अपराध माना जाएगा।

भड़काऊ बहस और पैनलिस्टों पर जिम्मेदारी लाइव डिबेट के दौरान अगर कोई पैनलिस्ट सांप्रदायिक तनाव या भड़काऊ बयान देता है, तो चैनल मूकदर्शक नहीं बना रह सकता। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में चैनल को तुरंत फीड बंद करने या प्रसारण रोकने जैसे आक्रामक कदम उठाने होंगे। संपादकीय नियंत्रण अब लाइव प्रसारण के दौरान भी अनिवार्य होगा।

AI का इस्तेमाल, पर सीमा में खबरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग अब सरकार की निगरानी में है। चैनल ग्राफिक्स या वर्चुअल प्रेजेंटर के लिए AI का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यह केवल सहायक होना चाहिए। एआई के कारण खबर की सत्यता, प्रमाणिकता और संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।

चैनलों को अब क्या करना होगा? मंत्रालय ने सभी चैनलों को अपने संपादकीय रिव्यू सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दी है। इसके अलावा, अपने कर्मचारियों के लिए नियमित ट्रेनिंग और वर्कशॉप आयोजित करने को कहा गया है ताकि वे प्रोग्राम कोड के बारीकियों को समझ सकें। सरकार का यह कदम न्यूज रूम की संस्कृति में एक बड़ा बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है।

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